हुनर के बग़ैर कैसे होगा मेक इन इंडिया?

skill_jobs इमेज कॉपीरइट thinkstock

भारत की 65 प्रतिशत आबादी इस समय 35 साल से कम उम्र की है.

युवा शक्ति से भरपूर इस देश में शिक्षित युवाओं की संख्या भी अच्छी-खासी है, लेकिन स्किल या हुनर की बात आने पर तस्वीर बदल जाती है.

फरवरी 2015 को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे में यह कहा गया कि देश के वर्कफ़ोर्स का केवल दो प्रतिशत हिस्सा ही स्किल्ड (हुनरमंद) है.

सीआईआई की इंडिया स्किल रिपोर्ट-2015 के मुताबिक, भारत में हर साल सवा करोड़ शिक्षित युवा रोज़गार की तलाश में इंडस्ट्री के दरवाज़े खटखटाते हैं लेकिन उनमें से 37 प्रतिशत ही रोज़गार के काबिल होते हैं.

नेशनल स्किल्ड डेवेलपमेंट कॉरपोरेशन के ताज़ा आकंड़ों में साल 2022 तक भारत को 24 विभिन्न सेक्टरों में करीब 12 करोड़ स्किल्ड लोगों की ज़रूरत होगी.

छोटे शहरों की बड़ी समस्या

इमेज कॉपीरइट thinkstock

छोटे शहरों में शिक्षित बेरोज़गारी की समस्या और भी विकराल रूप ले रही है. इसका कारण है कि यहां के युवा तकनीकी डिग्री तो पा लेते हैं लेकिन उन्हें प्रैक्टिकल ज्ञान कम होता है और इसीलिए वे दौड़ में पीछे रह जाते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

इंडस्ट्री को स्किल्ड वर्कफोर्स देने वाले इंडो-जर्मन (MSME) टूल रूम के जनरल मैनेजर प्रमोद जोशी तकनीकी विषय में स्किल डेवलपमेंट का महत्व बताते हुए कहते हैं कि तकनीकी ज्ञान के साथ हुनरमंद बनने के लिए प्रैक्टिकल करना बहुत ज़रूरी है.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

वे कहते हैं, “किताबी ज्ञान के बाद मशीनों पर काम करने से न केवल प्रैक्टिकल ज्ञान बढ़ता है बल्कि छात्रों में एक आत्मविश्वास भी आता है.”

जोशी कहते हैं कि इंजीनियरिंग के वर्तमान सिलेबस में थ्यौरी का भाग अधिक है, इसलिए यदि डिग्री के बाद भी कहीं से प्रैक्टिकल ज्ञान मिल सकता है तो वह लेना चाहिए.

जोशी ने बताया कि मैकेनिकल और अन्य विषयों में बीई की डिग्री कर चुके कई छात्रों को कहीं नौकरी से पहले मशीनों पर ट्रेनिंग लेना ज़रूरी है जिससे कि वे इंडस्ट्री में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें.

रोज़गार के बेहतर अवसर और उन्नति के लिए अधिकतर इंडस्ट्री एक्सपर्ट भी विद्यार्थियों को यही सलाह देते हैं कि तकनीकी डिग्री के साथ स्किल ज़रूर बढ़ाएं.

इंडस्ट्री की ज़रूरत

इमेज कॉपीरइट thinkstock

भोपाल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के काउंसलर प्रोफेसर अनुराग पटेल कहते हैं, “स्किल्ड लोगों में एक अलग तरह का आत्मविश्वास होता है. एक चीज़ को सीखने के बाद दूसरी नई चीज़ सीखने की ललक इन्हें आगे बढ़ाती है”.

वे कहते हैं कि जर्मनी, जापान, कोरिया जैसे देशों में अधिकतर मानव संसाधन स्किल्ड है और यही उनकी सफलता का राज़ है.

डिजिटल मार्केटिंग की एक कंपनी के सीईओ संदीप सिंह का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात है कि स्किल इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से होनी चाहिए, ऐसा हुनर जिसकी इंडस्ट्री को ज़रूरत हो और जिसे नवीनतम तकनीक के अनुसार ढाला जा सके.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

मान लें कि लोगों के पास स्किल है मगर इंडस्ट्री की मांग के अनुसार न हो तो स्किल और मार्केट के बीच में तालमेल नहीं हो पाएगा, ऐसी स्थिति में स्किल होने के बावजूद लोगों को रोज़गार नहीं मिल पाएगा.

नेशनल सैंपल सर्वे के एक अध्ययन के मुताबिक के अनुसार कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त करीब 44 प्रतिशत और टैक्सटाइल प्रशिक्षण प्राप्त लगभग 60 प्रतिशत लोग स्किल्ड होने के बाद भी खाली बैठे हैं.

ऐसे में मेक इन इंडिया को कामयाब बनाने के लिए स्किल्ड इंडिया पर ध्यान देना होगा.

(हिंदी भाषी छात्रों की मदद के मक़सद से ये बीबीसी हिन्दी और वेबदुनिया डॉट कॉम की संयुक्त पेशकश है. आने वाले दिनों में करियर से जुड़ी ज़रूरी जानकारियाँ हम आप तक पहुँचाएँगे.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार