सीबीआई के पास कितने मामले लंबित हैं?

  • 9 जुलाई 2015
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देश में अकसर कई बड़े अपराधों को हल करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की मदद लेने की मांग उठती है.

लेकिन सीबीआई के पास पहले से ही काफ़ी बोझ है और यदि मध्यप्रेदश के व्यापमं मामले की जांच भी सौंपी जाती है तो जांच एजेंसी के पास लंबित मामलों की संख्या 6562 हो जाएगी.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व्यापमं मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की सिफ़ारिश कर चुके हैं लेकिन पहले से ही कई मामलों की जांच कर रही इस एजेंसी के मार्फ़त जल्द इंसाफ़ मिलना थोड़ा मुश्किल है.

सीबीआई जांच पर फ़ैसला

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गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट इस बात पर फैसला करेगा कि इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए या नहीं. अगर ये मामला सीबीआई को सौंपा जाता है तो पहले इसकी जाँच करनी होगी, मुकदमा तभी शुरु हो सकता है जब जाँच पूरी हो और चार्जशीट दायर हो.

चौहान पर इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का दबाव था क्योंकि 2013 में जबसे जांच शुरू हुई है, व्यापमं से संबंधित अबतक 35 लोगों की मौत हो गई है.

मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं में मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए रिश्वतखोरी की बात सामने आने के बाद ये जांच शुरू हुई.

इस मामले में 2,500 लोगों को आरोपी बनाया गया जिनमें 1,900 लोग जेल में बंद हैं. मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच हो रही है.

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अब इस मामले में नए सिरे से जांच सीबीआई के लिए भारी चुनौती है, जो पहले से ही बड़ी संख्या में लंबित मामलों की जांच और सुनवाई से जूझ रही है.

पिछले चार सालों में सीबीआई के लंबित मामलों के बोझ में महज 9 प्रतिशत की कमी कर पाई है.

31 मार्च 2014 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2011 में इसके पास 7,178 मामले थे जो कम होकर 2014 में 6,562 हो गए.

कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित भ्रष्टाचार के मामलों में दिल्ली 765 के साथ सबसे ऊपर है.

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महाराष्ट्र में 691 मामले, पश्चिम बंगाल में 646 मामले, उत्तर प्रदेश में 596 मामले और तमिलनाडु में 474 मामले लंबित हैं.

पिछले चार सालों में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (1988) के तहत कुल 2,220 मामले दर्ज किए.

एजेंसी ने 1,512 मामलों की जांच पूरी की जबकि 708 मामलों की जांच लंबित है.

राष्ट्रीय अपराध ब्यूरों के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, साल 2013 के दौरान सीबीआई अदालतों में भ्रष्टाचार मामलों में सज़ा की दर 69 प्रतिशत थी.

सुस्त रफ़्तार

व्यापमं की जाँच एक हाईप्रोफ़ाईल मामला साबित होने के आसार हैं, जिसमें शीर्ष सरकारी अधिकारी और मंत्री तक संदेह के घेरे में हैं.

मध्यप्रदेश के गवर्नर रामनरेश यादव पर भी इस मामले में कथित रूप से जुड़े होने के आरोप लगे हैं. उनको हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहले से ही दायर है. इसकी भी सुनवाई गुरुवार को ही होनी है.

इस घोटाले के एक आरोपी ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के ख़िलाफ़ भी पुलिस में शिकायत दर्ज की है.

पिछले चार सालों में सीबीआई ने केंद्र सरकार के मंत्रियों, सांसदों और केंद्र एवं राज्य के पूर्व मंत्रियों के ख़िलाफ़ कुल 45 मामले दर्ज किए हैं.

इनमें 25 मामले विचाराधीन हैं जबकि 12 मामलों में जांच जारी है.

कोर्ट पर नज़र

Image caption मध्य प्रदेश व्यापमं से जुड़ी विभिन्न परीक्षाओं में घोटाले के आरोप हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पांच मामलों को एजेंसी ने बंद कर दिया है. एक मामले में उसने अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की है.

मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ पांच याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

इसमें कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास द्वारा व्यापमं की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाएं भी शामिल हैं.

व्यापमं मध्यप्रदेश सरकार का स्वायत्त निकाय है, जो पेशेवर कोर्सों में भर्ती के लिए प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करता है.

व्यापमं की वेबसाइट के अनुसार यह भारत में अपनी तरह का अकेला संस्थान है.

कई लोगों की मौत

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पिछले छह सालों में व्यापमं द्वारा आयोजित परीक्षाओं में क़रीब 70 लाख उम्मीदवार शामिल हुए हैं.

इस रिश्वत कांड में पहली मौत 2009 में प्रकाश में तब आई जब एक मेडिकल छात्र की बीमारी और दवाओं के रिएक्शन के कारण मौत हो गई.

पुलिस ने छात्र पर बिचौलिया होने का आरोप लगाया था.

इस मामले से जुड़े 500 लोग लापता हैं.

(ये रिपोर्ट indiaspend.org के आंकड़ों पर आधारित है)

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