आवारा कुत्तों पर बुलाई सर्वदलीय बैठक

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आम तौर पर राज्य सरकारें जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठकें बुलाती हैं ताकि दूसरे राज्यों के साथ जुड़े किसी विवादित मसले पर राजनीतिक एकता का प्रदर्शन किया जा सके.

लेकिन भारत के दक्षिणी राज्य केरल में गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक आवारा कुत्तों की समस्या पर बुलाई गई है.

ऐसा नहीं है कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल केरल में ही है. देश का लगभग हर शहरी इलाक़ा आवारा कुत्तों की समस्या से परेशान है.

विधानसभा में मुद्दा

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पिछले कुछ वर्षों में लगभग हर छोटे-बड़े शहरों में आवारा कुत्तों के काटे जाने से नवजातों और छोटे बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं.

लेकिन केरल अभी इसलिए चर्चाओं में है कि वहाँ एर्नाकुलम ज़िले के नुवात्तुपुझा में बड़ी संख्या में रेबीज़ प्रभावित कुत्तों को मारे जाने से पशु अधिकार कार्यकर्ता बेहद ख़फ़ा हैं.

यह मुद्दा मंगलवार को केरल विधानसभा में भी गूंजा.

मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने विधानसभा में कहा, “हमारे लोगों की सुरक्षा सर्वोपर्रि है. हालाँकि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर दो तरह की विचारधाराएं हैं, लेकिन हमें लोगों की ज़रूरतों का ख्याल रखना है और इस पर अंतिम निर्णय गुरुवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में लिया जाएगा.”

'ये तो समाधान नहीं'

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लेकिन पशुओं के अधिकारों को उठाने वाली संस्थाएं गुस्से में हैं और उनका आरोप है कि ‘रेबीज़ प्रभावित कुत्तों’ की आड़ में दूसरे कुत्तों को भी मारा जा रहा है. पशुओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाले रंजनी हरिदास ने बीबीसी से कहा, “हम जानते हैं कि उन्हें टीके लगाए गए हैं, क्योंकि ग़ैर सरकारी संगठनों ने ऐसा किया है.”

हरिदास ने कहा, “कोच्चि जैसी जगहों पर आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके लिए केरल का ख़राब कचरा प्रबंधन जिम्मेदार है. हम बताना चाहते हैं कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नियम-क़ायदे हैं. उनका क़त्लेआम कोई समाधान नहीं है.”

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