व्यापमं: जासूसी कहानी में बदलता घोटाला

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Image caption व्यापमं घोटाले के खिलाफ मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं

भारत में मेडिकल स्कूल में प्रवेश की परीक्षा सच्ची जासूसी की एक कहानी में तब्दील हो गई है.

इसमें हज़ारों गिरफ्तारियां और कई रहस्यमय मौतें हुईं हैं.

आला नेताओं और नौकरशाहों पर संदिग्ध गठजोड़ के आरोप लगे हैं.

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उनके पास शाम के वक्त एक फ़ोन आया.

उस समय वे कुछ विदेशी पत्रकारों को क्लीनिकल ट्रायल के पीड़ितों से मिलाने के लिए इंदौर जा रहे थे.

तारीख थी 13 जुलाई 2013. स्थानीय पुलिस ने छह दिन पहले ही शहर के एक होटल से कुछ छात्रों को पकड़ा था. पुलिस का आरोप था कि वे मेडिकल स्कूल प्रवेश परीक्षा में धांधली की योजना तैयार कर रहे थे.

मेडिकल अफसर डॉक्टर आनंद राय की पहचान एक सशक्त व्हिसिल ब्लोअर की है. मध्य प्रदेश में मेडिकल स्कूल की प्रवेश परीक्षा में किस तरह धांधली होती है, इसे लेकर वे सूचना मुहैया कराकर पुलिस की मदद कर रहे थे.

38 साल के डॉक्टर राय बताते हैं, "फ़ोन लाइन पर एक शख़्स था जो मुझे जान से मारने की धमकी दे रहा था. उसने कहा कि अब ये काम मत करो. इसके बाद उसने फोन काट दिया."

दो मिनट बाद उस शख़्स ने दोबारा फोन किया. उसने कहा,"ये नंबर पुलिस को मत देना. अगर ऐसा किया तो तुम्हें अंजाम भुगतना होगा."

मुंबई से जुड़ा तार

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Image caption व्हिसिल ब्लोअर की भूमिका निभाने वाले डॉक्टर आनंद राय

डॉक्टर राय ने तुरंत ये नंबर पुलिस को दे दिया. पुलिस ने पता लगाया कि कॉल मुंबई से किया गया था.

स्थानीय पुलिस की एक टीम मुंबई गई और फ़ोन करने वाले शख्स को गिरफ़्तार कर लिया.

वो व्यक्ति एक निजी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर था.

बाद में वो मेडिकल स्कूल दाखिले में धांधली से जुड़े भारत के सबसे बड़े स्कैंडलों में से एक के मास्टर माइंड के तौर पर सामने आया.

उसने जांच करने वालों को बताया कि व्यापमं के अधिकारी इस स्कैंडल में शामिल हैं.

व्यावसायिक परीक्षा मंडल को संक्षेप में व्यापमं कहा जाता है, जो मध्य प्रदेश में 50 से ज्यादा सरकारी नौकरियों और मेडिकल स्कूल में दाखिले के लिए परीक्षा कराता है.

परीक्षा में धांधली का तरीका

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    परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थी पड़ोस के राज्यों से मेडिकल छात्रों को अपनी जगह परीक्षा देने के लिए भाड़े पर तय करते हैं. ऐसे लोग परीक्षार्थियों की जगह शारीरिक परीक्षा तक में शामिल होते हैं.
  • परीक्षा के समय परीक्षार्थी मेडिकल स्टूडेंट्स को पैसे देते हैं और वो उनके करीब बैठकर नकल करने में मदद करते हैं.
  • प्रश्न पत्र लीक किया जाता है और परीक्षार्थियों को बेचा जाता है.
  • उत्तर पुस्तिका में धांधली की जाती है और परीक्षार्थियों को ज़्यादा नंबर दिए जाते हैं.
  • घोटाले में शामिल टीचर परीक्षा के बाद अधूरी उत्तर पुस्तिका को पूरा करते हैं.

बड़ा घोटाला

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स्कैंडल का पैमाना दिमाग को हिला देता है.

साल 2012 से अब तक करीब 2530 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. करीब 1980 लोग गिरफ्तार हुए हैं और पुलिस को अब भी 550 लोगों की तलाश है.

इस मामले से जुड़े 55 मुकदमों की सुनवाई मध्य प्रदेश की 20 अदालतों में हो रही है.

एक अनुमान के मुताबिक साल 2007 से व्यापमं द्वारा आयोजित परीक्षाओं में करीब एक लाख 40 हजार महिला और पुरुषों ने हिस्सा लिया है.

सरकार का कहना है कि व्यापमं के जरिए एक हज़ार से अधिक 'अवैध नियुक्तियां' हुई हैं. हालांकि डॉक्टर राय जैसे व्हिसिल ब्लोअर कहते हैं कि ये आंकड़ा कहीं बड़ा है.

प्रश्न पत्र लीक किए गए, उत्तर पुस्तिका में धांधली हुई, कैंडिडेट की जगह भाड़े के ऐसे लोगों को परीक्षा में बिठाया गया, जो खुद अच्छे छात्र थे. और सबसे ज्यादा बोली लगाने वालों को सीट बेची गईं. एक सीट के लिए 10 लाख से 70 लाख रुपए की रकम दी गई.

मामले के जांचकर्ताओं ने छात्रों की 10 हज़ार के करीब तस्वीरों को परखा है, जिनमें से कई में भाड़े के लोगों के जरिए गड़बड़ी की गई है.

उन्होंने कम से कम पांच हार्ड ड्राइव, तमाम पेन ड्राइव और लेपटॉप से इलेक्ट्रॉनिक जानकारियां जुटाई हैं.

मौत का डर

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इतना ही नहीं. बीते दो सालों में करीब 33 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर घोटाले से जुड़े थे. इसे लेकर संदेह उभरते हैं और तमाम तरह के षडयंत्र की कहानियां सामने आ रही हैं.

इनमें से दस की मौत सड़क हादसों में हुई. जांच से जुड़े एक अधिकारी ऐसी मौतों को लेकर कहते हैं कि गड़बड़ी का संदेह दूर करने के लिए इनकी आगे जांच होनी चाहिए.

इन तमाम मौतों को घोटाले से जोड़ना मुश्किल है, लेकिन इनकी वजह से दिल्ली केंद्रित अंग्रेजी भाषा का मीडिया द्रवित होकर जाग गया है और एक ऐसी स्टोरी को कवर करने में जुट गया है, जो दो साल से खदबदा रही थी.

समीक्षक मुकुल केसवन के मुताबिक ये मौतें, "अजीब और अंदर तक डराने वाली हैं."

आरोपी

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घोटाले में जिनका नाम लिया जा रहा है उनकी सूची चौंकाने वाली है.

इसमें राज्य में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी के एक पूर्व मंत्री, आरएसएस के ऊंचे ओहदे के एक अधिकारी के निजी सहायक, एक आला निजी मेडिकल स्कूल के मालिक, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव के सहयोगी, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के भाई, आला नौकरशाह, पुलिस अधिकारी और खनन से जुड़ा एक बड़ा उद्योगपति शामिल हैं.

हैरत नहीं है कि इस घोटाले से राज्य की बीजेपी सरकार को सबसे ज्यादा क्षति हुई है.

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री बाबू लाल गौर करते हैं, "ये अलीबाबा और चालीस चोर से बड़ा मामला है. इस घोटाले से राज्य बदनाम हुआ है. हमारे डॉक्टरों को भुगतना पड़ रहा है. अगर आप मध्य प्रदेश के डॉक्टर हैं तो लोग पूछेंगे 'आप असली हैं या फर्ज़ी.' "

दाग

भारत का चिकित्सा शिक्षा तंत्र दुनिया के सबसे बड़े सिस्टम में से एक है. सरकारी और निजी मिलाकर यहां 381 मेडिकल स्कूल विश्वविद्यालयों से जुड़े हैं. हर साल 70 हज़ार से ज्यादा छात्र पूर्व स्नातक (अंडर ग्रेजुएट) और स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) परीक्षा में दाखिल होते हैं. भारत में हर साल 30 हज़ार डॉक्टर तैयार होते हैं.

मेडिकल स्कूल की प्रवेश परीक्षा में धांधली से भारतीय डॉक्टरों की छवि पर दाग लगा है.

पिछले महीने भारत के सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्न पत्र लीक होने को लेकर मेडिकल स्कूल की मुख्य परीक्षा दोबारा कराने का आदेश दिया, जिसमें छह लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था.

जैसा कि डॉक्टर राय बताते हैं कि राज्य में मेडिकल स्कूल की परीक्षा में धांधली बीते कुछ समय से जारी है. प्रदेश सरकार इसकी तरफ आंखें मूंदे रहीं. हालाँकि तीन बार से मध्य प्रदेश में काबिज भारतीय जनता पार्टी सरकार दूसरों के मुकाबले ज्यादा दागदार नज़र आती है.

वे 2013 में व्यापमं घोटाले के सामने आने के पहले के मेडिकल स्कूल में धोखाधड़ी और परीक्षार्थी की जगह किसी और से परीक्षा दिलाने से जुड़े उन 32 मामलों की बात करते हैं, जिसमें पुलिस ने शिकायत दर्ज की थी.

वो कहते हैं, "ये नेताओं, नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों, छात्रों, अध्यापकों और दलालों का आपराधिक गठजोड़ है जिसमें हर कोई शामिल है."

संदेह

वे कहते हैं कि जब साल 1994 में उन्होंने मेडिकल स्कूल प्रवेश परीक्षा दी और प्रश्न पत्र लीक हुआ तब पहली बार उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ है. परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा इम्तिहान हुआ.

प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में एक मेडिकल कॉलेज के प्रोफ़ेसर को अभियुक्त बनाया गया. एक साल बाद किसी ने 40 गोलियां दागकर उनकी जान ले ली.

डॉक्टर राय कहते हैं कि जब साल 2005 में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट परीक्षा दी तो उन्होंने पाया कि पहले दस स्थानों पर रहे छात्रों की लिस्ट में एक अजीब बात थी.

उनके मुताबिक, "टॉप 10 कैंडिडेट में से सभी कामयाब अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के बेटे, बेटी और रिश्तेदार थे. ये बड़े संदेह वाली बात थी. तब मैंने पाया कि टॉप रैंकिंग हासिल करने वाले एक ही मेडिकल स्कूल हॉस्टल में रहते थे. हमने इसका विरोध किया और इसकी जांच की मांग की, लेकिन कुछ नहीं हुआ."

एक बदहाल सरकारी कार्यालय में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम करने वाले डॉक्टर राय को चार साल बाद फोन पर जान से मारने की पहली धमकी मिली. अब उन्हें सुरक्षा मिली हुई है.

बदल दिया पेपर

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वे कहते हैं कि उन्होंने पुलिस को एक मेडिकल स्कूल परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी दी. करीब 40 माता-पिता और छात्र गिरफ्तार हुए.

उनका कहना है कि व्यापमं से जुड़े लोगों ने ही पेपर लीक किया और जब ये मामला सार्वजनिक हो गया तो इसे बदल दिया.

इस मामले की जांच कर रही स्थानीय पुलिस पर निगरानी रखने के लिए गठित तीन सदस्यीय 'स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम' के प्रमुख और रिटायर्ड जज चंद्रेश भूषण कहते हैं, "व्यापमं एक बड़े मामले का एक छोर भर है. पूरे देश में यही हो रहा है."

"मैंने जितने भी घपले देखे हैं, उनमें ये सबसे बड़ा और हाईटेक है. पकड़े गए लोगों में से सिर्फ एक ही शख्स 300 बोगस भर्तियों का जिम्मेदार था. क्या आप इस पर भरोसा कर सकते हैं?"

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