मोदी मोबाइल ऐप से बन सकते हैं सुपर फ़ैन?

नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने ही 'नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप' लॉंच किया है.

अधिक से अधिक प्रशंसकों तक पहुंचने के मकसद से तैयार इस ऐप में मोदी सरकार के अभियानों पर अपनी मुहर लगाई जा सकती है और इसे दोस्तों के बीच साझा भी किया जा सकता है.

ये ऐप आपको प्वाइंट और बैज जीतने का मौका भी देता है.

क्या है इस ऐप की खूबियां और खामियां बता रहे हैं तकनीकी मामलों के जानकार कृष राघव.

ऐप की खूबियां और खामियां

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नरेंद्र मोदी नाम के इस नए ऐप को गूगल प्ले से मुफ़्त डाउनलोड किया जा सकता है.

इस नए ऐप में बेहद स्मूथ स्वाइप की सुविधा है.

ऊपर की तरफ स्वाइप करने पर नए निर्देश दिखते हैं और ऐप फ़ीड को रिफ्रेश करने के लिए नीचे स्वाइप करना होता है.

नई सरकारी योजनाओं को अप्रूव करने के लिए बाएं और नई योजनाओं को अप्रूव करने के लिए दाएं स्वाइप करना होता है.

गुड गवर्नेंस के लिए ये इंटरनेशनल डेटिंग ऐप ‘टिंडर’ जैसा है. बस आप योजनाओं पर अप्रूव कर सकते हैं और अपनी इस मंज़ूरी को साझा कर सकते हैं.

अक्सर, आप को समझ में नहीं आता है कि आप किस चीज पर अपनी मंज़ूरी दे रहे हैं.

'पोल'

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इस ऐप में एक ‘पोल’ सेक्शन है, जिसमें पहला सवाल यही किया जाता है कि, “आपकी समझ में सरकार की निम्न पहल में से किसमें सबसे ज़्यादा है?”

‘सबसे ज़्यादा’ क्या?

यह मायने नहीं रखता है.

कुल बात ये है कि आप सवाल को अप्रूव करें और फ़ेसबुक के अपने 900 दोस्तों को बताएं (जैसा कि मैंने किया) कि आप पुरजोर तरीके से मानते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान में 'सबसे ज़्यादा है'.

ऐप में शेयर करने पर ख़ासा ज़ोर दिया गया है. हर सप्ताह आपको बारबार संदेश आता है कि शेयर, शेयर, शेयर.

यहां तक कि आप फ़ेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस या फिर नरेंद्र मोदी अकाउंट पर लॉगइन किए बिना मोदी के बारे में रोजमर्रा की ख़बरें भी नहीं पढ़ सकते.

ऐप की कन्फ्यूज करने वाले डिजाइन के बीच ऐप में 'शेयर' का छोटा सा हरा बटन ही वो स्थाई फ़ीचर है जो लगातार दिखता रहता है.

उम्मीद

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जब मैंने पहली बार नरेंद्र मोदी ऐप को डाउनलोड किया तो मुझे कुछ ऐसी उम्मीद थी:

एक साधारण मोदी केंद्रित एग्रीगेटर की मौजूदगी जो सुव्यवस्थित सोशल मीडिया मशीन को और तेज़ करने के लिए बनाया गया हो.

इसे इस तरह से बनाया गया हो कि उनके तमाम ऑनलाइन स्रोतों से एक ही जगह मोदी न्यूज़ और अपडेट मिल जाए.

आप प्रधानमंत्री के पुराने रेडियो प्रोग्राम सुन सकते हों या मीडिया में सभी सकारात्मक कवरेज को पढ़ सकते हों.

मैं ये सब उम्मीद कर रहा था.

अंक और बैज का खेल

लेकिन मैं वीडियोगेम की तो कतई उम्मीद नहीं कर रहा था.

ऐप अपने बारे में जो पहली बात बताता है, वो है, “अंक जुटाइए और बैज जीतिए.”

“बैज पहचान और बढ़ी हुई ज़िम्मेदारी के साथ आते हैं.”

अच्छी बात है.

“इन सभी को हासिल कीजिए और खुद को असली चेंजमेकर के रूप में स्थापित कीजिए.”

यहीं पर चीजें चालाकी और धोखे से भरी लगती हैं.

अंक देकर और बैज से नवाजकर, यह ऐप सरकारी नीतियों पर आपके अप्रूवल को एक खेल में तब्दील कर देता है.

एक खिलाड़ी के रूप में, यह मेरे दिमाग में पुराने जमाने की प्रतिस्पर्द्धा का भाव जगाता है. ऐप ने मुझे बताया कि मैंने 10 प्वाइंट अर्जित कर लिए हैं और 80 प्वाइंट के बाद मुझे ‘अति सक्रिय’ बैज से नवाजा जाएगा.

चुनौती स्वीकार है, मिस्टर मोदी

प्वाइंट अर्जित करने के दो तरीक़े हैं. पोस्ट को लाइक कर सरकारी नीतियों पर अपनी सहमति देकर और ऐप के लेखों को अपनी टाइमलाइन पर शेयर करके.

मैंने इसमें हाथ आजमाया. मैंने पोल के सवालों के जवाब दिए और पांच अंक हासिल किए. विश्व योग दिवस की रैली में मोदी के शामिल होने के बदले मुझे दो अंक मिले.

मैंने जून में ढाका विश्वविद्यालय में मोदी के भाषण को शेयर किया और मुझे दो अंक मिले.

और जो कुछ था बस यही था. अप्रूव करने के लिए कुछ और नहीं बचा. ऐप ‘जुड़े रहने’ का संदेश देता है.

“विभिन्न नीतियों का समर्थन कर योगदान करें.”

मैं 19 प्वाइंट पर ही अटका हूँ, अति सक्रिय बैज के लिए अभी भी 61 अंक कम पड़ रहे हैं.

मैं और नीतियों को अप्रूव करने के लिए बेचैन हूँ.

ऐप की कुछ और सामग्रियों को पढ़कर मैंने खुद को सांत्वना दी, मसलन, मोदी की ज़िंदगी की कुछ झलकियां, जिसे अनथक आदर और सम्मान के साथ लिखा गया है.

मैंने पाया कि वो सांगठनिक रूप से एक कुशल व्यक्ति हैं, जिसने प्रशासन की कला में मास्टरी हासिल की है.

कितने स्टार?

सरकारी नीतियों के बारे में प्रेस रिलीज़ के अंदाज़ में लिखे लेखों, चार्ट और ग्राफ़िक्स से मैंने नज़र फेर दी. (क्योंकि, वाकई आप उसे देख नहीं सकते.)

लेकिन ऐप में एक बेहतरीन रीडिंग इंटरफ़ेस दिया गया है जिसका लेआउट दिलचस्प है, ये आपको फ़ोटो, चार्ट्स और वीडियो छांटने में मदद करता है.

और कुछ करने लायक बचा न होने और अपना बैज पाने की कोई सूरत न देखते हुए मैं ऐप के ‘गिव फ़ीडबैक’ सेक्शन पर रुक गया.

मुझे ऐप का वो आग्रह याद है जिसमें मुझसे जिस किसी भी तरीक़े से योगदान करने के लिए कहा गया और मैंने वीडियोगेम और प्वाइंट सिस्टम की बुनियादी गड़बड़ी के बारे में समीक्षा लिखने की सोची.

लेकिन इससे मैं परेशान नहीं हूं. आखिरकार मैं ‘अति सक्रियता’ का बैज भी नहीं पा सका.

तो, इस ऐप को कितने अंक दूँ? दो स्टार.

(ये लेखक के निजी विचार हैं. कृष राघव कॉमिक बुक आर्टिस्ट और पॉलिसी एनालिस्ट हैं.)

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