व्यापमं: 'बीवी-बेटे के बाद अब मुझे मरने की जल्दी'

  • 11 जुलाई 2015
नारायण भदौरिया

"इन दिनों मैं ईश्वर से दो बार प्रार्थना करता हूँ कि जल्दी बुलावा भेज दे. चार दिनों के भीतर ही बेटे और बीवी को गंवाने के बाद अब मुझे मरने की जल्दी है".

ये कहना है नारायण सिंह भदौरिया का.

62 साल के नारायण ग्वालियर के ऐसे पुराने इलाके में रहते हैं जहाँ अब बंद हो चुकी जेसी मिल के हज़ारों मज़दूर बसे हैं.

बिना पूरे प्लास्टर वाले इस छोटे से पुराने घर की सफ़ाई लगता है वर्षों से नहीं हुई है.

कांच मिल के इस मोहल्ले में सभी लोग अपने घरों से झाँक कर हर आने वाले पर नज़र रखते हैं.

मौतें

व्यापमं घोटाले में नाम आने के बाद नारायण के बेटे रामेन्द्र सिंह ने 7 जनवरी को आत्महत्या कर ली थी.

एक रात पहले परिवार वालों के साथ खाना खाकर अपने कमरे में गए रामेन्द्र ने फांसी लगा ली थी.

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चार दिन बाद रामेन्द्र की माँ कुसमा देवी ने बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर के एक बोतल तेज़ाब पी लिया और उनकी भी मौत हो गई.

नारायण भदौरिया पत्नी के आखिरी शब्द याद कर रुआँसे हो उठे, "जीवन की सभी गलतियों को माफ़ कर दीजियेगा".

कारण

रामेन्द्र सिंह ने एमबीबीएस की पढाई 2013 में जीआर मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से पूरी की.

फिर एक वर्ष तक के नौकरी करने के सरकारी बॉन्ड को पूरा करने के लिए वे गुना सरकारी अस्पताल चले गए.

जब मन नहीं लगा तो पिताजी से कहा कि वापस आकर खुद ही बॉन्ड से छुटकारा पाने के लिए 75,000 रुपए की फ़ीस भरूंगा.

पिता के पास तो पैसे थे नहीं इसलिए ग्वालियर के एक निजी बिड़ला अस्पताल में नौकरी शुरू करने से पहले पिताजी के हाथ में 80,000 रुपए रख दिए.

जांच

भदौरिया परिवार पर पहाड़ तब टूटा जब 22 अक्टूबर 2013 को जीआर मेडिकल कॉलेज में जारी जांच के बाद रामेन्द्र का नाम उछला.

रामेन्द्र पर प्री मेडिकल परीक्षा के दौरान 'फ़र्ज़ी आदमी से अपनी जगह परीक्षा दिलवाने' का आरोप लगाया गया, हालांकि उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई.

कुछ महीनों बाद ही नारायण भदौरिया के घर रामेन्द्र के मेडिकल कॉलेज से एक सन्देश पहुंचा जिससे पता चला उसकी डिग्री निलंबित कर दी गई थी.

बाद में कई बार रामेन्द्र को थाने में पूछताछ के लिए बुलाया जाता रहा. वे डिप्रेशन के शिकार भी हो गए.

पिता नारायण ने बताया, "बेटा मरीज़ हो गया और 2014 की हमारी दीवाली तो अस्पताल में उसका उपचार कराने में बीती".

दावा

स्थानीय पुलिस का दावा है कि रामेन्द्र ने अपनी 'प्रेमिका' द्वारा ठुकराए जाने की वजह से आत्महत्या की थी.

पिता नारायण बेटे के प्रेम से इनकार नहीं करते और ये भी बताते हैं कि उसके विवाह संबंधी योजना का उन्होंने शुरू में विरोध भी किया था.

उन्होंने कहा,"क्योंकि वो दूसरी जाति की थी तो हमारे मानने के बावजूद हमें यकीन नहीं था उसके घरवाले मानेंगे की नहीं. फिर भी मैंने बेटे से कहा तुम उसी से ब्याह करके अपने जीवन में खुश रहो".

लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार इसकी सम्भावना प्रबल है कि घोटाले में नाम आ जाने के कारण रामेन्द्र से उनकी महिला मित्र ने भी नाता तोड़ लिया.

अफ़सोस

नारायण भदौरिया को इस बात का अफ़सोस है कि रामेन्द्र की मौत के अगले ही दिन व्यापमं घोटाले की जांच करने वाली एसटीएफ ने कहा कि उनका नाम तो पहले ही अभियुक्तों की सूची से हटा दिया गया है.

हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि रामेन्द्र की मौत के बाद उनकी माँ कुसमा ने भी आत्महत्या कर ली.

ये मामला इस बात का भी गवाह है कि व्यापमं घोटाले की जांच पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.

पिता नारायण कहते हैं, "बेटा होनहार निकला था तो उम्मीदें बंध गई थी, अब तो रिश्तेदारों के लाए भोजन से काम चलता है".

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