छह पीढ़ियों से संतूर की साधना

  • 11 जुलाई 2015
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प्रख्यात संतूर वादक अभय रुस्तम सोपोरी कश्मीर के सूफ़ियाना घराने से ताल्लुक रखते हैं.

उनकी छह पीढ़ियाँ संतूर वादन की संगीत साधना को समर्पित रही हैं.

संतूर 'शततंत्री वीणा' को सौ तारों वाली वीणा भी कहते हैं. इसे फ़ारसी भाषा से संतूर नाम मिला है.

परिवार में संगीत के साथ उच्च शिक्षा पर भी ज़ोर रहा जिसके चलते चुनाव की संभावना बनी रही और अभय ने संगीत को चुना.

अभय ने संगीत में तंत्रकारी के साथ गायकी का प्रयोग कर संतूर वादन में कई नए प्रयोग किए हैं.

उन्होंने श्रीनगर में आयोजित 'एहसास-ए-कश्मीर' कॉन्सर्ट में ज़ुबिन मेहता और बवेरियन स्टेट ऑर्केस्ट्रा के साथ पारंपरिक कश्मीरी वाद्य यंत्रो को लेकर संगत की.

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Image caption अभय रुस्तम सोपोरी मशहूर संतूर वादक हैं.
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Image caption संतूर भारत के सबसे लोकप्रिय वाद्य यंत्रों में से एक है.
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Image caption एक जमाने में संतूर सिर्फ वादी-ए- कश्मीर में बजाया जाता था.
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Image caption अभय रुस्तम सोपोरी अपने भतीजे को रियाज़ करवाते हुए.
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Image caption संतूर अपनी तरह का अनोखा वाद्य है जो तार का साज़ होने के बावजूद लकड़ी की छोटी सी छड़ से बजाया जाता है.
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Image caption अभय का मानना है, हमें नयी पीढ़ी को संगीत की शिक्षा ज़रूर देनी चाहिए पर उन्हें बाँधना नहीं चाहिए, चुनाव की स्वतंत्रता जरूरी है.
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Image caption अपने स्टूडियो में रियाज़ के दौरान अभय रुस्तम सोपोरी.
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Image caption शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए सोपोरी परिवार हर साल सा मा पा संगीत सम्मेलन का आयोजन करता है.
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Image caption ' एहसास-ए-कश्मीर ' में ज़ुबिन मेहता के साथ अभय रुस्तम सोपोरी.

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