एक गाना जिसने बाँट दिया एक राज्य

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ओडिशा इस समय दो तरह के लोगों में बंटा हुआ है, एक वो जो कोक स्टूडियो-एमटीवी द्वारा बनाए गए और यू ट्यूब पर लाखों हिट्स बटोरने वाले 'रौन्गौबौती' रीमिक्स का विरोध करते हैं और दूसरा वो जो इस विरोध का विरोध कर रहे हैं.

यहां तक कि घर इस पर बहस छिड़ गई है. पिछली पीढ़ी 'रौन्गौबौती' के इस संस्करण को संबलपुरी और उड़िया अस्मिता और संस्कृति की तौहीन मानती है तो बेटे को समझ नहीं आता कि उसके पिता किस बात को लेकर नाराज़ हैं.

'रंगबती' गीतः क्यों है विवाद

जबकि सोना महापात्र और ऋतुराज महांती की आवाज़ से सजे इस गाने ने ओडिशा के लोक गीत को पूरी दुनिया में पहुँचाया है.

लोकगीत

'रौन्गौबौती' संबलपुरी (पश्चिमी ओडिशा की भाषा) लोकगीत पर आधारित गाना है. सत्तर के दशक में बने इस गाने के बिना ओडिशा में आज भी कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरा नहीं होता.

अस्सी के दशक आते आते कोलकाता से लेकर मुंबई और पटना से लेकर दिल्ली तक लोग इसकी धुन पर थिरकने लगे, भले ही उन्हें गाने के बोल समझ में न आते हों.

मित्रभानु गौंतिया का गया, प्रभुदत्त प्रधान के संगीत में पिरोया और जितेन्द्रिय हरिपाल और कृष्णा पटेल की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे बीबीसी और वॉइस ऑफ़ अमेरिका में भी स्थान मिला.

विवाद की शुरुआत

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कोक स्टूडियो की 'रौन्गौबौती' अभी औपचारिक रूप से रिलीज़ भी नहीं हुई थी कि मूल 'रौन्गौबौती' के गीतकार मित्रभानु गौंतिया और संगीतकार प्रभुदत्त प्रधान ने इसके बनाने वालों के ख़िलाफ़ कॉपीराइट एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनपर एक करोड़ रुपये का मुक़दमा कर दिया.

भुवनेश्वर और सम्बलपुर में सोना महापात्र और ऋतुराज मोहंती के ख़िलाफ़ पुलिस में दो मामले भी दर्ज़ किए गए.

'रौन्गौबौती' रीमेक का विरोध करने वालों का दावा है की इसमें मूल गाने के बोल को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और धुन के साथ खिलवाड़ किया गया है, जिससे उसकी संबलपुरी पहचान पूरी तरह से नष्ट हो गई है.

दूसरी तरफ़ 'एमटीवी पीढ़ी' के लोगों को मानना है कि कोक स्टूडियो ने मूल 'रौन्गौबौती' को एक नया आयाम दिया है और इसे पूरी दुनिया में पहुंचाया है.

कुछ लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि सोना महापात्र का 'रौन्गौबौती' मूल गाने से भी बेहतर है.

सोशल मीडिया पर दोनों ही पक्ष अपने अपने तर्क दे रहे हैं.

राज्य गान का रिमिक्स

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Image caption 'रंगबती' में 'बंदे उत्कल जननी' रितुराज महांती ने गाया है.

हालाँकि इस विवाद में ज़्यादातर 'रौन्गौबौती' का ही उल्लेख किया जा रहा है.

लेकिन बहुतों को यह मालूम नहीं कि सोना महापात्र के पति राम संपत के संगीत निर्देशन में बने इस मेडली (कई गानों को मिलाकर) का एक बड़ा हिस्सा 'इंडियाज़ रॉ स्टार' के विजेता ऋतुराज महांती की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया ओडिशा का राज्य संगीत 'बंदे उत्कल जननी' का रीमिक्स है.

हालांकि उसे महांती ने अपने अंदाज़ में गाया है.

लोगों का कहना है कि इस गाने को तोड़, मरोड़ कर पेश करना इसकी तौहीन है. उनका कहना है कि राष्ट्र गान 'जन गण मन' की तरह 'बन्दे उक्तल जननी' के बोल और धुन सर्वमान्य हैं और इनसे छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता.

लेकिन ऋतुराज का दावा है की उन्होंने इस राज्य संगीत से छेड़खानी नहीं की और इसे पूरी दुनिया मैं पहुचाया है.

आलोचनाओं पर ऋतुराज कहते हैं; "हज़ार तालियों में अगर दो गालियां भी मिलती हैं, तो मैं इससे बिलकुल परेशान नहीं हूँ."

भाषाई दरार

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इस विवाद ने ओडिशा के क्षेत्रीय भावनाओं के संघर्ष को फिर से सतह पर ला दिया है.

पश्चिमी ओडिशा के लोग जहां इसे पूरी तरह से संबलपुरी भाषा और संस्कृति का मुद्दा मानकर चल रहे हैं, वहीं तटीय ओडिशा में अधिकतर लोग 'बड़े उत्कल जननी' को लेकर नाराज़ हैं.

उन्हें लगता है कि पश्चिमी ओडिशा के लोगों ने केवल रौन्गौबौती का विरोध कर यह साबित कर दिया है की उन्होंने अपने आप को एक बृहत्तर उड़िया संस्कृति का हिस्सा आज तक नहीं माना.

'रौन्गौबौती' रीमिक्स ने कुछ और भले किया हो, लेकिन ऐसा लगता है कि इसने उड़िया लोगों को क्षेत्रीय आधार पर बाँट दिया है.

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