'उफ़ा का बयान देख पाक में 'उफ़' निकल गई'

  • 15 जुलाई 2015
नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ़, रूस के उफ़ा में इमेज कॉपीरइट MEAIndia

भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की गाड़ी एक बार फिर रूस के उफ़ा में चलनी शुरू हुई है. अभी इसकी रफ़्तार बहुत ढीली है लेकिन ख़ास बात यह है कि आखिरकार यह चल पड़ी है.

पिछले साल रमज़ान के दौरान दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया था जिसमें हुर्रियत नेताओं ने शिरकत की थी.

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नाराजगी जताते हुए विदेश सचिव स्तर की वार्ता स्थगित कर दी थी.

कहा जा रहा है कि दक्षिण एशिया में अपने हितों की देखते हुए अमरीका और चीन ने दोनों देशों के बीच बातचीत की गाड़ी को चलाने के लिए उसमें तेल डालने और धक्का देने की व्यवस्था की थी.

चरमपंथ की परिभाषाएं

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Image caption सार्क देशों के सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ़.

पाकिस्तान में इस गाड़ी को चलाने के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी किया था. जिसके कारण नवाज़ शरीफ़ पर गाड़ी की ड्राइविंग सीट नरेंद्र मोदी के हवाले करने का आरोप लग रहा है.

उनके आलोचकों का कहना है कि उन्होंने भारत के फ़ायदे की तो सभी बातें बयान में रखीं लेकिन कश्मीर का उल्लेख न करके बहुत बड़ा 'अपराध' किया है.

पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तानी सेना ने भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के पाकिस्तान ख़ासकर बलूचिस्तान में दखलअंदाजी का जो ख़ाका तैयार किया था वो भी संयुक्त बयान में कहीं दिखाई नहीं दिया.

दोनों देशों का समस्या ये है कि दोनों के बीच आज तक चरमपंथ की परिभाषा पर सहमति नहीं बन सकी है.

रोज़ के विवाद

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Image caption नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में आए नवाज़ शरीफ़

रूस के उफ़ा में दिए गए बयान को देखकर पाकिस्तान में कइयों की 'उफ़' निकल गई थी. संभावना थी कि नवाज़ शरीफ को देश वापस आने के बाद कड़े सवालों का जवाब देना होगा, और हुआ भी यही.

पाकिस्तानी सरकार की विदेश मामलों के विशेषज्ञ इस बयान के बचाव के लिए मैदान में कूद पड़े.

राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामलों पर प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज़ को प्रेस कांफ्रेंस करनी पड़ी.

वहीं प्रधानमंत्री के विदेश मामलों पर विशेष सहयोगी तारिक़ फ़ामी एक निजी टीवी चैनल के टॉक शो में बैठकर साझा बयान देकर बचाव करते रहे.

साझा बयान से स्पष्ट होता है कि दोनों देशों ने हाल के दिनों में सामने आई समस्याओं से निपटने की कोशिश की है. जिसमें सीमा पर तनाव में कमी, मछुआरों की रिहाई और सबसे महत्वपूर्ण मुंबई हमले की जांच शामिल हैं.

ये समस्याएं कश्मीर और सर क्रीक जैसे बड़े मुद्दों तक बात बढ़ने ही नहीं दे रहे. यानी गाड़ी दरवाज़े पर तभी आएगी जब दैनिक विवाद ख़त्म होंगे.

महत्वपूर्ण मुद्दे

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Image caption मुंबई का ताज होटल जिसपर हमला हुआ था

पाकिस्तान की तसल्ली के लिए यही काफी था जिसका उल्लेख सरताज अजीज़ ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों देश तनाव कम करने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बातचीत के लिए माहौल पैदा करने पर सहमत हैं.

इसके अलावा पाकिस्तान के लिए एकमात्र सफलता अगर किसी को माना जाए तो यह थी कि खुद नरेंद्र मोदी ने वार्ता की गाड़ी के रास्ते में जो रोड़े अटकाए थे उनको उन्होंने खुद ही हटाए हैं.

लेकिन पाकिस्तान ने उफ़ा में तो नहीं लेकिन इस्लामाबाद में स्पष्ट कर दिया कि कश्मीर विवाद पर बातचीत के बिना औपचारिक वार्ता शुरू नहीं की जाएगी.

मुंबई हमले पर तो बात हुई लेकिन समझौता एक्सप्रेस के बारे में चुप्पी भी पाकिस्तान प्रतिनिधिमंडल के लिए अच्छी नहीं थी.

अब सरताज अजीज़ साहब ने बताया कि इस विषय में भी बैठक में भारत से और अधिक जानकारी मांगी गई है.

भविष्य

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अपने गंतव्य पर भारत-पाकिस्तान वार्ता की जंग खाई गाड़ी आज तक नहीं पहुंच पाई है.

देखना होगा कि जो चुनौतियां और कठिनाइयां उसके सामने हैं, उसमें इस बार यह दो क़दम आगे और तीन क़दम पीछे जाती है या नहीं.

फिलहाल इस गाड़ी के लिए वैकल्पिक ट्रैक भी खोल दिया गया है तो उम्मीद की जा सकती है कि यह आगे बढ़ पाएगी.

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