'जब लोग मास्टर शेफ़ दामाद ढूंढेंगे'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 'स्‍किल इंडिया कैंपेन' के तहत युवाओं को व्यवसायिक, तकनीकी एवं कौशल विकास शिक्षा दी जाएगी.

उन्होंने बुधवार को 'स्‍किल इंडिया कैंपेन' यानी ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ की औपचारिक शुरुआत करते हुए ये बात कही.

इस योजना के तहत वर्ष 2022 तक 50 करोड़ लोगों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. केंद्र सरकार ने इस मिशन के लिए 5,040 करोड़ रुपए का बजट रखा है.

इस मिशन के तहत अगले साल तक 24 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और फिर उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए आर्धिक मदद देने का प्रावधान भी किया गया है.

भारत में हुनरमंद कामगारों की संख्या मात्र 3.5 प्रतिशत ही है.

विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए विभाग के मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी का कहना था कि इस मिशन को कामयाब तब ही माना जाएगा जब भारत को ऐसे हुनरमंद कारीगरों के लिए दुनिया में माना जाएगा.

'मास्टर शेफ़ दामाद'

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उनका कहना था, "यह कामयाबी तब ही होगी जब लोग सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर ही दामाद और बहु के रूप में ना ढूंढें बल्कि वो मास्टर शेफ़ या मास्टर ब्यूटीशियन भी ढूंढें."

कौशल विकास मिशन के तहत लगभग 500 ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ युवाओं को प्रशिक्षण देने की रूपरेखा तैयार की गई हैं. इसमें सरकारी विभागों और उपक्रमों के अलावा निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी शामिल किया गया है.

इस मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना था कि अगर भारत के लिए पिछली शताब्दी आईआईटी की थी तो आने वाली शताब्दी आईटीआई की होगी.

पिछली योजनाओं का हाल

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हालांकि फिक्की के पूर्व अध्यक्ष राजीव कुमार का कहना है कि पिछली सरकारों ने भी इस तरह की योजना बनाई थी जो सिर्फ़ फाइलों में ही सिमट कर रह गई.

वो कहते हैं, "भारत में आज भी 51 प्रतिशत खेती कौशल पर आधारित न होकर श्रम पर आधारित है. योजना सिर्फ़ शहर को ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाक़ों की आवश्यकता को भी ध्यान में रखते हुए बनाना चाहिए."

योजना के तहत अगले पांच सालों में 34 लाख स्किल्ड बेरोजगारों को ऋण दिए जाने का लक्ष सरकार ने रखा है.

आर्थिक मामलों के जानकार शंकर अय्यर इसे एक सराहनीय पहल मानते हैं. मगर उनका कहना है कि बहुत कुछ इसे लागू के तरीकों पर ही निर्भर करेगा.

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