जातिगत जनगणना पर केंद्र ने राज्यों को घेरा

  • 16 जुलाई 2015
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भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा कि किसी भी राज्य ने जातिगत जनगणना पर अभी तक केंद्र को कोई जवाब नहीं भेजा है.

जेटली ने पत्रकारों से कहा, "यह आँकड़ा राज्य सरकारों को नौ दस महीने पहले ही भेज दिया गया था. राज्यों से कहा गया था कि वो इन सब जातियों और उप-जातियों के आँक़ड़ों को एकत्रित कर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दें. मगर किसी भी राज्य ने अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है."

समिति का गठन

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केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना के आधार पर जातियों के आंकड़ों को वर्गीकृत करने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पानगढ़िया के नेतृत्व में एक कमिटी का गठन किया है.

हालांकि, जेटली का कहना था कि इस तरह की समिति के गठन का फैसला यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही लिया गया था जो राज्यों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट का आकलन करने के बाद इन आंकड़ों को सार्वजनिक करेगी.

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जेटली ने कहा कि आंकड़ों में देश की 46 लाख जातियां, उप जातियां और गोत्रों आदि का विवरण मौजूद है.

क़ानून निरस्त होंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्री परिषद में कई और भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.

जेटली ने बताया कि भारतीय में 295 ऐसे पुराने पड़ चुके क़ानून हैं, जिन्हें निरस्त करने का भी फैसला लिया गया. इसके साथ ही ई-कोर्ट के दूसरे चरण के लिए 1670 करोड़ रूपए आवंटित करने का भी निर्णय लिया गाय.

जेटली ने बताया कि इसके अलावा 400 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना, 6-लेन के ईस्टर्न पेरीफेरल हाईवे योजना, 8500 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली विद्युत प्रसारण की अंतर-राज्य योजना को भी मंत्रिमंडल की सहमति मिल गयी है.

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