जयललिता की सेहत पर अटकलें क्यों लगीं?

  • 19 जुलाई 2015
जयललिता इमेज कॉपीरइट PTI

ऐसा लगता है कि भारत कुछ ऐसे देशों से ज़्यादा अलग नहीं है जहां नेताओं के सार्वजनिक तौर पर सामने न आने से उनकी तबियत को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म हो जाता है.

पिछले हफ्ते दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में कुछ ऐसा ही देखने को मिला.

यहां इसे लेकर उन मीडिया संस्थानों के ख़िलाफ़ मानहानि के मामले तक दर्ज हो गए जिन्होंने शक्तिशाली क्षेत्रीय नेता और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयराम जयललिता की तबियत को लेकर सवाल उठाए थे.

उनकी पार्टी के प्रवक्ता ने इस मामले में कहा, "67 साल की उम्र में वो किसी भी दूसरे इंसान की तरह लाइफ़स्टाइल से जुड़ी दिक्कतों का सामना कर रही हैं. इसलिए, चिंता की कोई बात नहीं है."

लेकिन यहां सवाल है कि नेताओं के स्वास्थ्य को लेकर रहस्य क्यों रहता है?

विस्तार से पढ़ें

इमेज कॉपीरइट AFP

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बीमारी की वजह को लेकर बने रहस्य के अलावा, हालिया बरसों में ऐसा कोई नेता नहीं है जिसकी तबियत इतना बड़ा मुद्दा बनी हो.

दो दशक से भी पहले तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन के स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर अटकलबाजी हुई थी.

वो गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे और अमरीका के एक अस्पताल में तीन महीने रहे थे.

साल 1990 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल की तबियत का मुद्दा उठा था.

जब वो लकवे का शिकार हुए तब ये राज्य के इतिहास की सबसे बदतरीन सांप्रदायिक हिंसा का गवाह बना.

वो कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे और राजीव गांधी ने उन्हें तत्काल हटा दिया.

रहस्य क्यों?

इमेज कॉपीरइट PTI

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक केएन अरुण ने बीबीसी से कहा, "इकलौती बार ऐसे मामलों में साफ़गोई डीएमके के संस्थापक और मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई की तबियत के मामले में दिखी थी. डीएमके उस वक्त कहीं ज़्यादा लोकतांत्रिक पार्टी थी. अब डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही एक व्यक्ति आधारित पार्टियां हैं. अगर उनके नेताओं को कुछ होता है तो पार्टी काडर परेशान हो जाता है."

लेखिका वासंती कहती हैं, "आठ महीने तक वो (जयललिता) अपने घर से बाहर नहीं निकलीं. यहां तक कि जब उन्हें दोषमुक्त किया गया तब वो पार्टी कार्यकर्ताओं के समूह का अभिवादन करने बालकनी में नहीं आईं, जैसा कि वो पहले करती थीं. यहां तक कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वो सार्वजनिक तौर पर कम ही दिखी हैं. इसी वजह से उनकी तबियत को लेकर अटकलबाजी शुरू हो गई है."

वासंती ने जयललिता की जीवनी लिखी है, जिस पर प्रतिबंध लगा हुआ है.

बयान

इमेज कॉपीरइट AFP

पारंपरिक इफ़्तार दावत में जयललिता की गैर-मौजूदगी ने एआईएडीएमके को बयान जारी करने के लिए मजबूर किया. इसमें कहा गया था कि 'अचानक बीमार होने के कारण' वो मौजूद नहीं हो सकीं.

इससे राजनीतिक विरोधियों को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का मौका मिल गया.

उस वक्त तक उन्होंने 23 मई को हुए शपथ ग्रहण समारोह में लोगों के बीच सिर्फ 30 मिनट बिताए थे और आरके नगर के अपने उपचुनाव में करीब दो घंटे प्रचार किया था.

अरुण कहते हैं, "इसकी बड़ी वजह ये थी कि विपक्षी डीएमके ने उनकी तबियत को लेकर सवाल उठाए थे. डीएमके नेता एम करुणानिधि 92 वर्ष के हैं और उनकी तबियत अच्छी नहीं. तब भी एक घंटे या दो घंटे के लिए सार्वजनिक तौर पर सामने आते हैं ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहे."

वासंती कहती हैं, "करुणानिधि का ये बयान कि उन्हें अपनी तबियत के बारे में स्थिति साफ करनी चाहिए, को लेकर भी जयललिता ने उस तरह का तीखा पलटवार नहीं किया जिसके लिए वो पहचानी जाती हैं."

राजनीतिक असर

इमेज कॉपीरइट PTI

अरुण कहते हैं, "उनकी तबियत के बारे में संदेह जाहिर करना करुणानिधि के लिए मुनासिब है. इससे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले एआईएडीएमके के कार्यकर्ताओं के दिमाग में भ्रम की स्थिति बनेगी."

तो जयललिता के स्वास्थ्य की स्थिति कैसी है?

एआईडीएमके प्रवक्ता और सांसद रबी बर्नार्ड के मुताबिक, "उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई गंभीर बात नहीं है. हमें समझना चाहिए कि वो 67 साल की हैं और हर इंसान को लाइफ स्टाइल से जुड़ी कुछ दिक्कतें होती हैं. हो सकता है कि स्वास्थ्य से जुड़ी कोई छोटी दिक्कत हो जो 5-10 दिन के आराम से ठीक हो जाएगी."

चुनाव की फिक्र

इमेज कॉपीरइट PTI

लेकिन, पार्टी कार्यकर्ता और उनके विरोधी उनके सेक्रेटेरिएट में बिताए गए समय के अंतर पर गौर कर रहे हैं.

इस हफ्ते की शुरुआत में करुणानिधि ने जबसे उनकी तबियत को राज्य के प्रशासन से जोड़ा है, तब से ये औसतन 5 घंटे से घटकर 45 मिनट हो गया है.

एआईएडीएमके कार्यकर्ताओं की चिंता ये है कि अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और पार्टी में ऐसा कोई नहीं है जो उनकी जगह ले सके.

हालांकि ऐसी चिंता जाहिर करने वाला कोई कार्यकर्ता अपने नाम का खुलासा नहीं करना चाहता.

वासंती कहती हैं, "उनकी पार्टी में उनके जैसा करिश्मा किसी और के पास नहीं "

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार