छत्तीसगढ़ में भी व्यापमं जैसा घोटाला?

  • 19 जुलाई 2015
डॉक्टर, आला, स्टेथेस्कोप, फ़ाइलें इमेज कॉपीरइट Press Association

छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं घोटाले से जुड़े चार साल पुराने एक मामले में शुक्रवार को रायपुर की एक अदालत ने पांच आरोपियों को 6-6 साल की सज़ा सुनाई है.

अब विपक्षी दल कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में भी मध्यप्रदेश की तर्ज पर सीबीआई जांच की मांग की है.

कांग्रेस का आरोप है कि पिछले 15 सालों में व्यापमं ने जितनी भी परीक्षाएं करवाई हैं उनकी जांच की जाए तो यहां भी मध्यप्रदेश की तर्ज़ पर ही घोटाला सामने आएगा.

छत्तीसगढ़ में 19 जून 2011 को व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित की थी.

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'पुलिस अधीक्षक के ख़िलाफ़ भी जांच'

परीक्षा से 12 घंटे पहले पुलिस ने बिलासपुर के तखतपुर में एक मकान पर जब छापा मारा तो पाया कि वहां परीक्षार्थियों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर पहले से ही मिल गए थे.

इसके बाद इस मामले में 72 परीक्षार्थियों के ख़िलाफ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया. इनमें से 24 अभियुक्त अब भी फ़रार हैं.

इसी मामले में रायपुर में अंतरर्राज्यीय गिरोह का पता चला और 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जिसमें शुक्रवार को फैसला आया.

इस मामले के मुख्य अभियुक्त बेदीराम और अखिलेश आज तक फरार हैं. इन पर मध्यप्रदेश व्यापमं में भी शामिल होने का आरोप है.

अदालत ने इस मामले में कई लोगों को छोड़ने और उन्हें अभियुक्त नहीं बनाए जाने को लेकर सख्त टिप्पणी की.

कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को मामले की जांच करने वाले पुलिसकर्मियों और पुलिस अधीक्षक के ख़िलाफ़ विभागीय जांच शुरू करने और इनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

सीआईडी जांच

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साल 2011 में जब यह मामला सामने आया तो पुलिस ने पहले की परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की आशंका जताई और जांच शुरू की.

पता चला कि रायपुर और बिलासपुर के मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पढ़ रहे हैं, जिन्होंने प्रवेश परीक्षा में भाग ही नहीं लिया था.

45 मेडिकल स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ अब तक कार्रवाई के बाद आज भी इस घोटाले की सीआईडी जांच चल रही है.

इस घोटाले को केवल एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में 2008 की मेडिकल प्रवेश परीक्षा के टॉपर और अभियुक्त फ़जल मसीह को रायपुर के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला था.

कायदे से आज तक उन्हें डॉक्टर बन जाना चाहिए था. लेकिन हालत ये है कि इन 7 सालों में फजल मसीह एक भी परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं.

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