'दक्षिण एशिया का सबसे पुराना गैरीसन चर्च' बदहाल

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित सेंट मैरीज़ चर्च(चर्च ऑफ़ इंग्लैंड) क़रीब 200 साल पुराना है. इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर(इनटैच) के अनुसार ये दक्षिण एशिया का सबसे पुराना गैरीसन चर्च है.

ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एनी बेसेंट और मशहूर भारतविद् जेम्स प्रिंसेप जैसे लोगों का इस चर्च से संबंध रहा है. इसके बावजूद आज ये बेहद ख़राब हालत में है.

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चर्च की बुनियाद 1810 में ईस्ट इंडिया कंपनी के चैप्लीन डेनियल कोरी ने रखी थी. 1812 तक इसका बुनियादी ढांचा बनकर तैयार हो गया था.

1820 के दशक में जेम्स प्रिंसेप ने स्थानीय नागरिकों की मदद से इसकी मीनार और बाक़ी इमारत बनवाई. उस समय सभी धर्मों के लोग इस चर्च में आते थे.

भारत को आज़ादी मिलने तक ये एक प्रोटेस्टैंट चर्च था जो चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के अधीन था.

भारत की मशहूर स्वतंत्रता सेनानी एनी बेसेंट यहाँ प्रार्थना करने आया करती थीं.

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26 फ़रवरी, 1961 को ब्रिटेन की महारानी एलीज़ाबेथ और राजकुमार प्रिंस फ़िलिप ने चर्च का दौरा किया.

उन दोनों के साथ तत्कालीन काशी नरेश और भारतीय राजनेता विजयलक्ष्मी पंडित भी चर्च आए थे.

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पानी के जमाव के कारण इमारत का काफ़ी हिस्सा कमज़ोर होकर नवंबर, 1997 में गिर गया.

उसके बाद मरम्मत के लिए ज़रूरी राशि के अभाव में इसका जीर्णोद्धार नहीं हो सका.

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आज ये हाल है कि शहर के बीचोबीच कैंट इलाक़े में स्थित सैलानियों के लिए एक दर्शनीय स्थल के रूप में मशहूर इस ऐतिहासिक चर्च में कोई नहीं आता.

हालांकि चर्च से जुड़े लोग आज भी हिन्दी और अंग्रेजी में प्रार्थना और पूजा करते हैं.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के सांसद है. उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद इस इलाक़े में धार्मिक पर्यटन को विशेष बढ़ावा देने की बात कही थी.

स्थानीय ईसाई समुदाय को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक इमारत का भी जीर्णोद्धार होगा. क्योंकि हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों ही की तरह वाराणसी का ईसाई धर्म से भी ऐतिहासिक संबंध है.

(विश्वजीत मुखर्जी 'सेंट मैरीज़... द हेरिटेज इन रुइंस' डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक हैं.)

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