अफ़सर से बदसलूकी, छिन जाएगा बॉडीगार्ड?

  • 20 जुलाई 2015
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झारखंड में हाल ही में गढ़वा ज़िले के एसपी को गाली देने के आरोप में पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दूबे की गिरफ़्तारी हुई. इसके बाद राज्य सरकार के एक आदेश पर सबकी नज़रें टिकी हैं.

दरअसल इस आदेश के तहत उन लोगों के सरकारी बॉडीगार्ड छीन लिए जाने का ख़तरा है, जो अफ़सरों के साथ अभद्रता से पेश आएंगे.

अगर उनके पास हथियारों के लाइसेंस हैं तो समीक्षा करने के बाद वो भी रद्द हो सकते हैं.

हालांकि विपक्ष ने इन निर्देशों पर सवाल खड़े किए हैं.

बॉडीगार्ड हटाए जाएं

सरकार का कहना है कि सरकारी अफ़सरों को सुरक्षा उपलब्ध कराने और उनका मनोबल बनाए रखने के लिए वो प्रतिबद्ध है.

इसलिए पिछले दिनों राज्य के मुख्य सचिव राजीव गौबा ने झारखंड के सभी पुलिस अधीक्षकों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं.

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राजीव गौबा ने सभी उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि अगर सरकारी सुरक्षा प्राप्त कोई व्यक्ति किसी सरकारी अफ़सर के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो उसे तत्काल समीक्षा कर सुरक्षा सुविधा से वंचित किया जाए.

उन्होंने आगे कहा कि अगर उस व्यक्ति को शस्त्र के लाइसेंस मिले हों, तो समीक्षा कर वो भी रद्द किए जाएं.

मुख्य सचिव के मुताबिक़ ऐसे मामलों को सरकार ने गंभीरता से लिया है, इसलिए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए.

कब, किसने किसके साथ की 'बदसलूकी'?
2011 कांग्रेस के पूर्व विधायक योगेंद्र साव पर एक बीडीओ को पीटने का मामला दर्ज हुआ था.
2011 बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो पर पाटलीपुत्र मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (धनबाद) के अधीक्षक के साथ धक्का-मुक्की का मामला दर्ज हुआ.
2012 बरही के पूर्व विधायक अकेला यादव पर एक पुलिस अधिकारी की पिटाई के आरोप में मामला दर्ज हुआ.
2012 पलामू के पूर्व सांसद कामेश्वर बैठा पर एक इंजीनियर की पिटाई के आरोप लगे.
2011 चतरा ज़िले के एक बीडीओ की पिटाई के आरोप में पूर्व विधायक जयप्रकाश भोक्ता पर मामला दर्ज हुआ.
2011 गोड्डा के पूर्व विधायक संजय यादव पर एक अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगा.

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाए

राजीव गौबा के इस निर्देश के बाद झारखंड में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सवाल खड़े किए हैं.

सोरेन ने इस बारे में राज्य के मुख्यमंत्री को एक पत्र भी भेजा है.

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इस पत्र में कहा गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी को काम करने के लिए भयमुक्त माहौल मिलना ही चाहिए लेकिन इसके लिए पर्याप्त क़ानून और व्यवस्था है.

पत्र में आगे कहा गया है कि इसके बावजूद इस तरह के आदेश का मतलब है कि सरकार जनता और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ दबाना चाहती है.

सोरेन ने सरकार से पूछा है कि क्या राज्य आपातकाल की तरफ़ बढ़ रहा है?

मर्यादा का ख़्याल

इस बीच, मुख्य सचिव के इन निर्देशों पर शनिवार को मीडिया से मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, "नेता हों या अफ़सर सभी का मर्यादित आचरण होना चाहिए."

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रघुवर दास ने कहा, 'मुख्य सचिव ने कोई ग़लत कदम नहीं उठाया है. सुशासन के लिए यह सब ज़रूरी है. अधिकारियों को अपमानित नहीं होने देंगे."

झारखंड पुलिस सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद जोसेफ़ तिग्गा कहते हैं, "सिस्टम का बने रहना ज़रूरी है. सरकारी कर्मचारी भयमुक्त होकर काम करें, इसके लिए नियम, क़ानून का पालन होना ही चाहिए."

वहीं झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के अध्यक्ष दानियल कडुंलना का कहना है, "यह सच है कि कई मौक़े पर अफ़सरों को दबाव का सामना करना होता है. सरकार की ये कोशिशें बेहतर काम का माहौल खड़ा करने में मददगार होगी."

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