जयपुर: फिर बनाए जाएंगे तोड़े गए मंदिर

  • 22 जुलाई 2015
जयपुर के रोजगारेश्वर मंदिर को तोड़ते मज़दूर. इमेज कॉपीरइट SURENDRA JAIN PARAS

जयपुर में मंदिरों को तोड़े जाने के बढ़ते विरोध और चक्का जाम के बाद अब राजस्थान सरकार कुछ अति प्राचीन मंदिरों को उनके मूल स्थान पर फिर से बनवाने के लिए राजी हो गई है.

ये मंदिर कथित रूप से मेट्रो कॉरिडोर के बीच में पड़ने के कारण हटाए गए थे.

इसके लिए मंदिर संघर्ष समिति ने करीब दो हफ़्ते पहले चक्का जाम किया था. इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का पूरा समर्थन था.

सकारात्मक परिणाम

समिति के प्रवक्ता विवेक गुप्त के मुताबिक़ इस आंदोलन का सकारात्मक परिणाम सामने आया है. सरकार के साथ संवाद से सभी मांगों पर सहमति बनी है.

इमेज कॉपीरइट ABHA SHARMA

शहर में पुराने मंदिर तोड़े जाने पर संघ और जनता की तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

समिति के संयोजक बद्री नारायण चौधरी ने बीबीसी को बताया, "समिति के सभी बिंदुओं पर सहमति बनी है पर सरकार ने उचित कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय माँगा है.''

महादेव मंदिर

इमेज कॉपीरइट SURENDRA JAIN PARAS

चौधरी ने बताया कि सरकार ने अति प्राचीन 23 मंदिरों में से छोटी चौपड़ स्थित रोज़गारेश्वर महादेव मंदिर सहित 13 मंदिरों को उनके मूल स्थान पर ही तैयार करने का आश्वासन दिया है.

तोड़े गए कुल 87 मंदिरों की सूची भी सरकार ने समिति को दी है. इनमें से 23 प्राचीन मंदिर 1947 से पूर्व से प्रतिष्ठित थे. कुछ मंदिर तीन सौ साल पुराने थे.

वहीं सरकार की ओर से समिति से संवाद करने वाले सामाजिक और अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी मानते हैं मंदिर तोड़ना प्रशासनिक थी. जिस धर्म सम्मत विधान से मंदिरों को हटाया जाना चाहिए था, उनका पालन ठीक से नहीं हुआ किया गया. इससे जनभावनाएं आहत हुईं.

भाजपा बनाम कांग्रेस

इमेज कॉपीरइट ABHA SHARMA

चतुर्वेदी ने बीबीसी को बताया कि राजे सरकार देश की पहली सरकार है जो धार्मिक पर्यटन पर इतना पैसा खर्च कर रही है जिसमे मंदिर सहित उपासना के सभी केंद्र शामिल हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में 32 मंदिर हटाए गए थे. लेकिन एक भी को फिर नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 73 हटाए गए मंदिरों में से 44 को ज़मीन दे दी है.

उन्होंने कहा कि दो मंदिरों को लेकर जनता में विशेष रोष है. सरकार सभी लोगों के साथ बैठकर निर्णय लेगी. यदि प्रशासनिक लापरवाही पाई गई तो निश्चित रूप से कार्रवाई होगी.

विवेक गुप्त का कहना है कि एक मंदिर संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा. भविष्य में किसी भी मंदिर को स्थानान्तारित करने का काम इस समिति की पूर्व सहमति से होगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार