अफ़सरों को मुक़दमे से बचाने को क़ानून

  • 23 जुलाई 2015
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मध्य प्रदेश में एक ऐसा विधेयक पास किया गया है जिसके चलते अब किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोर्ट में याचिका लगाना आसान नही होगा.

मध्य प्रदेश व्यापमं को लेकर चौतरफा हमलों का सामना कर रही है.

विधेयक का नाम है, ‘तंग करने वाला मुकदमेबाजी (निवारण) विधेयक 2015’.

मध्य प्रदेश सरकार के मुताबिक़ ये ऐसा कानून है जिसके तहत अगर कोई किसी को तंग करने या परेशान करने के मक़सद से कोर्ट जाता है तो उसमें एडवोकेट जनरल की राय के बाद ही हाई कोर्ट की अनुमति से उसे दायर किया जा सकेगा.

लेकिन इस कानून से विपक्षी कांग्रेस सहित आरटीआई कार्यकर्ता तक, सभी नाराज़ हैं.

आलोचना

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने बीबीसी को बताया, “प्रदेश में पहले से ही खुला भष्टाचार है. अब सरकार ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों को और छूट दे दी है ताकि वो खुले तौर पर जो मर्ज़ी आए वो करें.”

वहीं आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे भी इसे ग़लत मानते है.

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उनका कहना है, “ये कानून संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ है. आख़िर आप का मक़सद क्या है? यही ना कि भ्रष्टाचारियों को बचाया जाए ताकि उनके ख़िलाफ कोई कोर्ट न जा सके.”

आखिर विधेयक है क्या?

'तंग करने वाला मुकदमेबाजी (निवारण) विधेयक 2015' के मुताबिक़ कोई व्यक्ति लगातार अलग-अलग मामलों में कोर्ट जाता है और वो सरकार, मंत्री, विधायकों या अधिकारियों की परेशानी का सबब बनता है तो ऐसी याचिकाओं पर एडवोकेट जनरल हाईकोर्ट को राय देंगे कि उस पर सुनवाई न की जाए, क्योंकि उसका मक़सद परेशान करना है.

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