'आईएस का भारत में विज़िटिंग कार्ड'

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पच्चीस सालों बाद पंजाब में हुआ चरमपंथी हमला इस्लामिक स्टेट (आईएस) का भारत में विज़िटिंग कार्ड है और यह एक सुनियोजित साज़िश के तहत किया गया है.

ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि पाकिस्तान के तमाम चरमपंथी संगठन आईएस के रहनुमाई में आ गए हैं.

पंजाब के गुरदासपुर में सोमवार तड़के हुए हमले में तीन हमलावार, चार पुलिसकर्मी और तीन नागरिक मारे गए हैं.

भारत के लिहाज़ से यह एक गंभीर मामला है इसे हलके में नहीं लिया जाना चाहिए.

यह एक अंतरराष्ट्रीय चरमपंथ का सवाल है. जैसे ब्रिटिश सम्राज्य अंतरराष्ट्रीय होना चाहती थी, कम्युनिस्ट अंतरराष्ट्रीय होना चाहते थे, हिटलर अंतरराष्ट्रीय होना चाहता था वैसे ही इस्लामी चरमपंथ अंतरराष्ट्रीय होना चाहता है.

सफलता

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पंजाब पुलिस ने इस मामले से जैसे निपटा है उससे एक संदेश यह भी मिलता है कि अगर पुलिस को सक्षम बनाया जाए तो वे ऐसे हमलों से निपट सकती है.

इंटेलिजेंस ब्यूरो को मिली ख़ुफ़िया जानकारी की जहाँ तक बात है तो इंटेलिजेंस ब्यूरो को यह ख़बर मिलती है कि ऐसी घटना होने वाली है, कहां होने वाली है यह नहीं पता होता.

काफ़ी समय से यह चर्चा चल रही है कि सिख चरमपंथ और इस्लामी चरमपंथ मिलकर एक संयुक्त मोर्चा बना सकते हैं.

इस संबंध में आईएस ने यूरोप और अन्य जगहों पर बैठकें की हैं लेकिन उसमें उनको सफलता नहीं मिली है.

ख़ालिस्तान ज़िंदाबाद फ़ोर्स नाम का एक संगठन बना था जिसपर पंजाब में क़ाबू पा लिया गया था लेकिन कश्मीर में इस पर क़ाबू नहीं किया जा सका था.

(पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल से बीबीसी संवाददाता समीरात्मज मिश्र की बातचीत पर आधारित)

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