स्पॉट फ़िक्सिंग मामले में कोई क़ानून नहीं

  • 28 जुलाई 2015
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स्पॉट फ़िक्सिंग मामले में श्रीसंत समेत दो अन्य खिलाड़ियों अंकित चव्हाण और अजित चंडीला पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला ना चला कर संगठित आपराधिक साज़िश का मामला चलाया.

इसकी वजह से कोर्ट ने इस मामले को ख़ारिज करते हुए कहा कि इसतरह का कोई मामला इसमें नहीं बनता.

पुलिस को इस मामले में यह क़दम ही नहीं उठाना चाहिए था क्योंकि सब जानते थे कि मकोका जैसे चार्ज को पुलिस साबित नहीं कर पाएगी.

हालांकि पुलिस अपने केस में दम होने का दावा करते हुए हाईकोर्ट में जाने की बात कर रही है.

दूसरी बात जो कोर्ट ने कही कि भारत में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जिसके आधार पर हम इस तरह के मामलों में चार्ज बना सके.

चूंकि बुकी के साथ बातचीत का टेपरिकॉर्ड मौजूद है इसलिए लगता नहीं है कि बोर्ड अपने कोड ऑफ़ कंडक्ट के आधार पर उनपर से प्रतिबंध ख़त्म करेगा.

प्रतिबंध

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चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के ऊपर जो प्रतिबंध दो साल के लिए लगे हैं वो भी किसी क़ानून के तहत नहीं लगा है बल्कि बोर्ड ने लगाया है.

इन दोनों टीमों के मामले में भी कोर्ट की ओर से बनाई गई समिति ने कहा था कि इनपर ये चार्ज बनते हैं और अब इनपर आप कार्रवाई अपने संविधान के हिसाब से करे.

कोर्ट के फ़ैसले के बाद इन प्रतिबंधों का आपराधिक मामलों से अब कोई संबंध नहीं रहा.

यह अफ़सोसजनक है कि अबतक इस संबंध में कोई क़ानून नहीं बन पाया है.

राजस्थान रॉयल्स के इन तीनों खिलाड़ियों पर आईपीएल 2013 के दौरान स्पॉट फ़िक्सिंग का आरोप था जिस वजह से इनके क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा हुआ था.

दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में तीनों खिलाड़ियों को स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप से बरी कर दिया है.

(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)

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