भारत, या बांग्लादेश! कहां बनाएं आशियाना!

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बिप्लब हुसैन चाहते हैं कि जब भारत और बांग्लादेश के बीच एन्कलेवों की अदला-बदली हो तो वह बांग्लादेश की नागरिकता लें. वह कहते हैं कि उनके पिता 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में लड़े थे.

उन्होंने पिछले 42 साल बांग्लादेश स्थित एक हिंदुस्तानी एन्कलेव में गुज़ारे हैं.

इस साल हुए एक भूमि सीमा समझौते (एलबीए) के बाद भारत और बांग्लादेश 31 जुलाई तक एन्कलेवों की अदला-बदली करेंगे.

बिप्लब कहते हैं कि वह अपनी बाक़ी ज़िंदगी बतौर बांग्लादेशी नागरिक गुज़ारना चाहते हैं.

छोड़कर जाने की तकलीफ़

Image caption बिप्लब हुसैन बांग्लादेश की नागरिकता लेना चाहते हैं.

भारतीय संसद ने हाल ही में भूमि सीमा समझौता विधेयक को स्वीकार किया है जिससे 1947 में भारत के विभाजन के समय से चली आ रही समस्या के समाधान का रास्ता बन गया है.

इस समझौते से भारत में मौजूद 111 सीमांत एन्कलेव बांग्लादेश में चले जाएंगे और 51 भारत का हिस्सा बन जाएंगे.

इससे दूसरे देश की सीमा में चारों ओर से घिरे हुए इलाक़ों में रहने वाले लगभग 50,000 लोगों की, कहीं का भी न होने की, अनिश्चितता ख़त्म हो जाएगी.

साल 2011 के मध्य में जारी भारत-बांग्लादेश संयुक्त बयान के अनुसार 51 बांग्लादेशी एन्कलेवों में क़रीब 14,000 और 111 भारतीय एन्कलेवों में 37,000 लोग रहते थे.

बिप्लब कुरहीग्राम में स्थित गारहोलिजोरहा-2 एन्कलेव, जिसे एलेन्गबारही एन्कलेव भी कहा जाता है, में अपनी बीवी और तीन बच्चों के साथ रहते हैं.

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अगर वह भारतीय नागरिकता लेते हैं तो उन्हें यह जगह छोड़कर जाना होगा लेकिन अगर वह बांग्लादेशी नागरिक बनना स्वीकार करते हैं तो यहीं रह सकते हैं.

बिप्लब कहते हैं, "मैं यहीं रहना चाहता हूं क्योंकि मेरे पिता मोहम्मद नूरुज़्ज़मां एक स्वतंत्रता सेनानी थे."

वह कहते हैं कि उन्हें बांग्लादेश सरकार से वो सुविधाएं नहीं मिली जो स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को मिलती है.

बिप्लब जिन्हें यहां से जाने में बहुत तकलीफ़ हो रही है, कहते हैं कि वह नई दिल्ली गए थे और वहां क़रीब नौ महीने तक काम किया था. अब वह अपने पिता से विरासत में मिली ज़मीन के एक टुकड़े पर खेती करते हैं.

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वह कहते हैं, "अगर बांग्लादेश (सरकार) मुझे मेरा परिवार पालने के लिए कुछ सहायता दे दे तो मैं भारत नहीं जाऊंगा. लेकिन अगर मुझे बांग्लादेश से कुछ नहीं मिला तो मैं जीवनयापन के लिए क्या करूंगा?"

एन्कलेव में रहने वाले कई लोग अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि किसके साथ जाना है. हालांकि अब यह साफ़ हो गया है कि उनका एन्कलेव 31 जुलाई के बाद किस देश का होगा.

(सुबीर भौमिक के साथ पश्चिम बंगाल के कूच बिहार से समीर पुरकायस्थ और बांग्लादेश के कुरहिग्राम से सुलेमान निलोय)

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