9 साल बाद भी कलाम की 'पुरा' योजना अधूरी

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कीचड़ से सनी हुई बकतरा गांव की गलियों से गुजरते हुए एक कोने में खड़े सरपंच उदयराम पटेल की आंखों में अब केवल पुरानी यादें बची हुई हैं.

आज से 9 साल पहले राष्ट्रपति रहते हुए एपीजे अब्दुल कलाम ने बकतरा गांव को सर्व-सुविधायुक्त आधुनिक गांव में बदलने के लिए 'पुरा' योजना का शिलान्यास किया था.

अपने विज़न 2020 के तहत एपीजे कलाम ने 'पुरा' योजना यानी 'प्रोवाइडिंग अर्बन सर्विसेस इन रुरल एरियाज़' की नींव रखी थी.

क्या थी योजना?

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इस योजना के तहत कुछ गाँवों का एक समूह बना कर उनमें अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना थी.

देश भर में इस तरह के कम से कम सात हज़ार 'पुरा' गांव बसाने की योजना थी.

बकतरा समेत 22 गांवों में बैटरी चलित वाहन, राष्ट्रीय स्तर का अत्याधुनिक अस्पताल, मोबाइल क्लिनिक, सौ फ़ीसदी साक्षरता, स्कूल-कॉलेज़, बैंक, 50 फ़ीसदी लोगों के पास रोज़गार और अत्याधुनिक संचार के तमाम संसाधन जैसी योजनाएं पुरा गांव के लिये बनाई गई थीं.

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इन सभी 22 गांवों को जोड़ने के लिए 37 किलोमीटर लंबी टू लेन सड़क भी बननी थी.

बकतरा गांव के सरपंच उदयराम पटेल कहते हैं, "गांव की सड़क की हालत तो आप देख ही रहे हैं. कलाम साहब स्कूल बनाने के लिए बोले थे, अपोलो अस्पताल बनाने के लिए बोले थे. रोड-रस्ता सब बनाउंगा, शहर बनाउंगा बकतरा को, सब बोले थे. लेकिन कुछ हुआ नहीं."

बकतरा गांव रायपुर जिले में राजधानी से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

पूरा होगा सपना

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गांव में न स्कूल खुले, न कॉलेज. इलाज के लिए आज भी गांव के लोगों को राजधानी रायपुर का रुख करना पड़ता है.

गांव में साफ पानी की किल्लत है तो सड़कों पर बहती नाली अपनी कहानी खुद कह डालता है.

गांव के लोग भी इस सरकारी उपेक्षा से नाराज़ हैं और उन्हें लगता है कि अब डॉक्टर अब्दुल कलाम के निधन के बाद पुरा गांव का सपना पूरा होने से रहा.

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जिन 22 गांवों को पुरा योजना में शामिल किया गया था, अधिकांश गांव आज भी विकास के पैमाने पर जहां के तहां खड़े हैं.

'पुरा' गांव के लिये शुरुआती वर्षों में ग्रामीण विकास विभाग के एक अफसर को नोडल अधिकारी भी बनाया गया था. लेकिन आज इस योजना का कोई नामलेवा तक नहीं है.

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ भी बात करने के लिये तैयार नहीं हैं.

अब कंपनियां करेंगी विकास

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लेकिन दस्तावेज़ बताते हैं कि केंद्र सरकार ने 'पुरा' गांव की ही तर्ज पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी अर्बन मिशन नाम से गांवों को सर्व-सुविधायुक्त बनाने की योजना पर काम शुरु किया है.

इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशीप का सहारा लिया जाएगा और निजी कंपनियां गांवों का विकास करेंगी.

इलाके में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर देवांगन कहते हैं, "श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से असल में इन गांवों को निजी कंपनियों के हवाले करने की योजना है. इन गांवों का विकास हो न हो और उन्हें इसका कितना लाभ मिलेगा यह तो कहना मुश्किल है. लेकिन निजी कंपनियां तो चांदी काटेंगी, यह तय है."

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