याक़ूब मेमन की फांसी की सज़ा बरक़रार

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सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने मुंबई धमाकों के दोषी याक़ूब मेमन की अपील ख़ारिज करते हुए कहा है कि इस मामले में किसी तरह की प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है.

याक़ूब मेमन ने अपील की थी कि क्यूरेटिव पिटीशन की सुनवाई और डेथ वारेंट जारी किए जाने की प्रक्रिया में ग़लतियां हुई थीं.

मंगलवार को याक़ूब की अपील की सुनवाई करने वाले दो जजों - ए आर दवे और कुरयिन जोसफ़ ने इस मामले पर अलग-अलग राय दी थी.

जहां जस्टिस दवे का कहना था कि याक़ूब को फांसी होनी चाहिए और उनकी अपील में कोई दम नहीं, वहीं न्यायाधीश जोसफ़ का कहना था कि याक़ूब के मामले में प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश इस मामले को तीन जजों की बेंच के पास भेजने का फ़ैसला किया था.

'उल्लंघन नहीं'

लेकिन बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए तीन जजों की बेंच ने कहा कि इस मामले में प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है.

याक़ूब के वकील ने कहा था कि क्यूरेटिव पिटीशन की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के ही दिए गए दिशा निर्देश का पालन नहीं हुआ था. मंगलवार की सुनवाई में एक जज जोसफ़ ने भी इस बात को स्वीकार किया था.

याक़ूब की दूसरी दलील थी कि उनकी न्यायिक अपील की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उन्हें फांसी देने के लिए डेथ वारेंट जारी कर दिया गया था जो कि उनके अनुसार क़ानूनी तौर पर ग़लत है.

महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा कर दी थी कि याक़ूब को 30 जुलाई को फांसी दी जाएगी.

इस बीच ख़बर आ रही है कि महाराष्ट्र के गवर्नर ने भी याक़ूब मेमन की दया याचिका ख़ारिज कर दी है.

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