याक़ूब को दी गई फांसी, मुंबई में कड़ी सुरक्षा

  • 30 जुलाई 2015
इमेज कॉपीरइट BBC World Service

सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सज़ा बरक़रार रखे जाने के बाद गुरुवार सुबह याक़ूब मेमन को फांसी दे दी गई है.

1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के दोषी पाए गए याक़ूब को सुबह नागपुर की जेल में फांसी हुई है.

बुधवार देर रात को सुप्रीम कोर्ट की विशेष सुनवाई के बाद आज सुबह क़रीब पाँच बजे जस्टिस दीपक मिश्र की अगुआई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याक़ूब की याचिका को ख़ारिज कर दिया था.

बुधवार को याक़ूब की ओर से दायर नई दया याचिका को भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से खारिज कर दिया गया था.

इस बीच महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) केपी बक्षी ने बताया के पोटमोर्टेम के बाद उनका शव भाई उस्मान और सुलेमान को सौंप दिया जाएगा.

'फांसी के वक्त गुल हुई बिजली'

इमेज कॉपीरइट pti

स्थानीय पत्रकार योगेश चिवंडे ने बताया कि स्थानीय पत्रकार के मुताबिक फाँसी के समय कुछ दो मिनट के लिए बिजली गुल हो गई थी.

योगेश चिवंडे के मुताबिक परिवार के दो लोगों को जेल के पास आने दिया गया था.

नागपुर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है. जेल के दो सौ मीटर के इलाके में नाकाबंदी कर दी गई है. मीडिया के रोक दिया गया है और आवाजाही के लिए केवल एक ही रास्ते को ख़ुला रखा गया है.

याक़ूब की याचिका ख़ारिज

इमेज कॉपीरइट Getty

कुछ दिन पहले याक़ूब मेमन ने अपील की थी कि क्यूरेटिव पिटीशन की सुनवाई और डेथ वारेंट जारी किए जाने की प्रक्रिया में ग़लतियां हुई थीं.

मंगलवार को याक़ूब की अपील की सुनवाई करने वाले दो जजों, एआर दवे और कुरयिन जोसफ़ ने इस मामले पर अलग-अलग राय दी थी.

जहां जस्टिस दवे का कहना था कि याक़ूब को फांसी होनी चाहिए और उनकी अपील में कोई दम नहीं, वहीं न्यायाधीश जोसफ़ का कहना था कि याक़ूब के मामले में प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था.

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश इस मामले को तीन जजों की बेंच के पास भेजने का फ़ैसला किया था जिसने याक़ूब को राहत देने से मना कर दिया था.

लेकिन बुधवार को याक़ूब मेमन ने फिर से राष्ट्रपति के सामने दया याचिका रखी थी.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस आज विधानसभा में याक़ूब की फाँसी पर बयान देंगे.

वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान जारी कर कहा है कि याक़ूब मेमन को फांसी देना भारत में फांसी की सज़ा के दुख़दायी इस्तेमाल को दर्शाता है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने कहा, "भारतीय सरकार ने एक व्यक्ति की निर्ममता से हत्या कर दी केवल यह साबित करने के लिए कि हत्याएं करना ग़लत है. 'इस फांसी से 1993 की पीड़तों को न्याय नहीं मिलेगा. यह चरमपंथ को रोकने का पथ से भटका हुआ प्रयास है, सज़ा देने के लिए अपराधिक न्याय प्रणाली का एक निराशाजनक इस्तेमाल.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए