मुद्रा नीति: 'आम आदमी को राहत की उम्मीद नहीं'

  • 4 अगस्त 2015
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भारतीय कारोबार की नज़रें मंगलवार को घोषित होने वाली रिज़र्व बैंक की मुद्रा नीति (क्रेडिट पॉलिसी) पर टिकी हैं.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन इसकी घोषणा करेंगे.

रिज़र्व बैंक की क्रेडिट पॉलिसी के आधार पर बैंकों की ब्याज दरें तय होती हैं.

केंद्र सरकार का रिज़र्व बैंक पर काफ़ी दबाव है कि वो महंगाई पर नियंत्रण लगाए.

बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने इस विषेय पर आर्थिक विशेषज्ञ आलोक पुराणिक से उनकी राय जानी है.

पढ़ें सवाल-जवाब के अंश

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Image caption रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन

क्रेडिट पॉलिसी के एलान के बाद आम लोगों की ईएमआई का बोझ कम होने के कोई संकेत दिखाई देते हैं?

क्रेडिट पॉलिसी को (उधार नीति) लेकर काफ़ी उम्मीदें हैं.

लगभग हर क्रेडिट पॉलिसी से बाज़ार को उम्मीद होती है कि रिज़र्व बैंक कुछ ऐसे नीतिगत संकेत देगा जिससे तमाम बैंकों की दरें कम हो जाएंगी.

रिज़र्व बैंक ने इन उम्मीदों को एक हद तक पूरा किया है लेकिन बाज़ार और उद्योग जगत वाले इससे संतुष्ट नहीं हैं.

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद रहती है लेकिन इस बार कैसे संकेत मिल रहे हैं?

आम आदमी का इससे ये संबंध होता है कि उसके बैंकों से लिए क़र्ज़ों की ईएमआई की दरें, ब्याज दरों के अनुसार ही बढ़ती या घटती हैं. अगर ब्याज दरें कम होंगी तो आम आदमी को फ़ाय़दा होता है.

लेकिन पिछले कुछ समय में महंगाई की दरों के कम होने के बावजूद रिज़र्व बैंक इससे बहुत संतुष्ट नहीं दिखाई दे रहा है.

उसे नहीं लगता कि महंगाई इतनी कम हो गई है कि ब्याज दरें भी कम कर दी जाएं.

आरबीआई को लगता है कि अगर वो ब्याज दरें कम कर देगा तो महंगाई कम हो जाएगी और लोगों की क्रय शक्ति बढ़ जाएगी, जिससे बाज़ार में माँग बढ़ जाएगी. माँग बढ़ने से महंगाई फिर बढ़ जाएगी.

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क्या ब्याज दरों को लेकर सरकार और रिज़र्व बैंक में कोई गतिरोध है?

रिज़र्व बैंक अपने आप में एक स्वायत्त संस्था है. वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि आरबीआई के बोर्ड में होते हैं. लेकिन महत्वपूर्ण फ़ैसलों को लेने के लिए गवर्नर स्वतंत्र होते हैं.

सरकार का दृष्टिकोण हमेशा राजनीतिक होती है. उसकी कोशिश होती है कि ब्याज दरें कम हो जाएं ताकि वो कह सके कि उसने ईएमआई कम करा दी.

आरबीआई की दृष्टि आर्थिक होती है. रिज़र्व बैंक के गवर्नर कभी नहीं चाहेंगे कि उनके कार्यकाल को ऐसे याद किया जाए कि वो महंगाई बढ़ाकर गए.

मुझे नहीं लगता कि सरकार के अनुरोध के बावजूद गवर्नर ब्याज दरें कम करेंगे. और वो शायद ही ऐसा कोई नीतिगत संकेत दें. उनके अब तक के बयानों से तो यही संकेत मिल रहा है.

अगर कोई चकित करने वाली घोषणा हो जाए तो अलग बात है.

इसलिए आम आदमी को इससे बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

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