जिन्हें नशा दीमक की तरह खोखला बना रहा है..

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पंजाब के कई ज़िले, ख़ास तौर पर सरहद से लगे इलाक़े नशीले पदार्थों के सेवन का दंश झेल रहे हैं.

पंजाब का लगभग 600 किलोमीटर का इलाक़ा ऐसा है, जो पकिस्तान की सरहद से लगा हुआ है.

90 के दशक में जब चरमपंथ अपने पूरे उफान पर था तब इस सरहद के साथ कंटीले तार की बाड़ लगाने का काम शुरू हुआ.

करंट के प्रवाह वाली इस कंटीली तार के बावजूद इस सरहद को नशीले पदार्थ की तस्करी का सबसे बड़ा रास्ता बताया जाता है.

दंश

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हरित क्रांति के अगुआ इस राज्य के पिछले चार सालों के आंकड़ों पर अगर नज़र डाली जाए तो पूर्वोत्तर राज्य मिज़ोरम के बाद पंजाब दूसरा ऐसा राज्य है जहाँ नशीले पदार्थों की सबसे ज्यादा बरामदगी हुई है.

यहीं की रहने वाली परमजीत कौर भी हैं जिन्होंने अपना जवान बेटा खोया है.

परमजीत कौर का कहना था कि बहुत कम उम्र में ही उनके बेटे को नशे की लत लग गई और महज़ 22 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई.

उनका बेटा भी उन हज़ारों पंजाबी युवकों में से एक है जिन्हें नशा दीमक की तरह खोखला बना रहा है.

बड़ी चूक

Image caption तरन तारन ज़िले के वरीय पुलिस अधीक्षक मनमोहन शर्मा कहते हैं कि आम लोगों को नशे के ख़िलाफ़ गोलबंद करना होगा.

पाकिस्तान की सरहद से ही लगे हुए तरन तारन ज़िले के वरीय पुलिस अधीक्षक मनमोहन शर्मा कहते हैं कि अब वक़्त आ गया है जब आम लोगों को नशे के ख़िलाफ़ गोलबंद करना होगा नहीं तो इस बुराई को कभी रोका नहीं जा सकेगा.

वो मानते हैं कि नशीले पदार्थ की तस्करी ज़्यादातर सरहद के इलाके से ही हो रही है.

तो क्या सरहद की सुरक्षा में कोई बड़ी चूक हो रही है?

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अमृतसर में सीमा सुरक्षा बल के उप महानिरीक्षक एमएफ फ़ारूकी ऐसा नहीं मानते.

उनका कहना है कि यह धारणा ग़लत है कि सुरक्षा बलों की चूक की वजह से सरहद पार से तस्करी होती है.

उन्होंने बताया, "सरहद के किनारे-किनारे कंटीले तारों की बाड़ है. लेकिन यह सरहद बिल्कुल ही ग़ैर स्वाभाविक है. यहाँ रावी नदी और बरसाती नाले भी हैं जो कहीं पर पकिस्तान में हैं तो कहीं भारत में. नदी और बरसाती नहरों के रास्ते हो रही इस तरह की तस्करी को रोकने में काफ़ी मशक्क़त का सामना करना पड़ता है."

अभियान

Image caption राजटाल के सरपंच बलकार सिंह का कहना है कि हो सकता है कुछ गांववाले तस्करों के साथ मिले हुए हों.

बीएसएफ़ के डीआईजी कहते हैं कि सरहद के बिल्कुल पास गाँव भी बसे हैं और वहां पर लगे कंटीले तारों के उसपार भी खेती होती है. कई बार यहाँ रहने वाले किसानों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता. तस्कर रात के अँधेरे का फायदा उठाकर कंटीले तारों के पार नशीले पदार्थ दाल देते हैं. फिर सरहद के इस पार मौजूद तस्कर उन्हें गांववालों की मिली भगत से वहां से उठा लेते हैं.

हालांकि इस इलाके में सीमा सुरक्षा बल ने नशीले पदार्थों की तस्करी के ख़िलाफ़ अभी तक का सबसे बड़ा अभियान चला रखा है.

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डीआईजी का दावा है कि पिछले 6 महीनों के दौरान बीएसएफ़ के जवानों ने लगभग 400 किलो नशीले पदार्थ बरामद किए हैं और कई तस्करों को मुठभेड़ में मारा भी है.

लेकिन सरहद के किनारे अटारी के पास के गाँव राजटाल के सरपंच बलकार सिंह का कहना है, "लोग ट्रैक्टर लेकर कंटीली तार के उस पार खेती करने जाते हैं. हो सकता है कि इनमें से कुछ तस्करों के साथ मिले हुए हों. मगर ऐसे गांववालों की संख्या बहुत कम है. सौ में से एक ही हो सकता है."

मुश्किल काम

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हालांकि अमृतसर के वरिष्ठ पत्रकार शम्मी सरीन कहते हैं कि जब तक नशे के तस्करों की पीठ पर राजनेताओं का हाथ रहेगा तब तक इसे रोक पाना मुश्किल होगा.

सीमा सुरक्षा बल और पुलिस का कहना है कि नशे की तस्करी की बड़ी वजह है नदी और बरसाती नाले और ये कि बरसात के मौसम में इन पर शिकंजा कसना मुश्किल हो जाता है.

रावी नदी के प्रवाह के रास्ते में कंटीले तारों की बाड़ लगाना मुश्किल काम है. और शायद इसी का फ़ायदा उठाकर बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थ सरहद के उस पार से भारत लाए जा रहे हैं.

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