द्युति चांद को 'वापसी से पहले थोड़ी घबराहट' है

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भारत की स्टार धाविका द्युति चांद पाबंदी के कारण क़रीब एक साल तक ट्रैक से दूर रहने के बाद बुधवार को वापसी कर रही हैं.

एथलेटिक संगठनों के अंतरराष्ट्रीय संघ (आईएएफ़) ने जुलाई 2014 में ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों के कुछ दिन पहले उन्हें अयोग्य क़रार दिया था.

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ये पाबंदी उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा सामान्य से ज़्यादा पाए जाने के कारण लगाई गई थी.

उन्होंने आईएएफ़ के फ़ैसले को चुनौती दी थी.

पिछले महीने कोर्ट ऑफ़ आरबिट्रेशन ऑफ़ स्पोर्ट्स (कास) ने आईएएफ़ के पाबंदी के फ़ैसले को दो साल के लिए स्थगित कर दिया.

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मैं अब अपनी ट्रेनिंग पर अधिक ध्यान दूंगी. पांच अगस्त से मैं रेलवे के खेलों में हिस्सा लूंगी और उसके बाद सितम्बर में एक और खेल आयोजन में हिस्सा लूंगी.

मेरा लक्ष्य रियो ओलंपिक में हिस्सा लेना है और इसके लिए मैं अपनी जगह पक्की कराना चाहूंगी.

'मानों मुझे नया जन्म मिल गया हो'

हालांकि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से पहले अंदर थोड़ी घबराहट तो है क्योंकि मैं इसके लिए लंबे से इंतज़ार करती रही थी और मैं नहीं जानती थी कि क्या फिर कभी मैं वापसी कर पाउंगी.

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अब इंतज़ार ख़त्म हो गया है, लेकिन थोड़ी घबराहट है क्योंकि मैं फ़ार्म में नहीं हूँ.

फ़ार्म में आने में कम से कम सात आठ महीने लगेंगे. फिर भी मुझे प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने का पूरा भरोसा है.

द्युति की जीत से दुनिया भर की खिलाड़ियों को फ़ायदा

पहले जब मैं दौड़ती थी तो, सोचती थी कि मैं अच्छा करूंगी. लेकिन अब मैं भारत के लिए खेलने को लेकर पहले से कहीं अधिक दृढ़ हूँ.

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Image caption द्युति चांद का घर

मैं बाईं ओर से दौड़ती हूँ. जब भी मैं बाईं ओर झुकाव लेकर दौड़ना शुरू करती हूँ, मेरा प्रदर्शन अच्छा रहता है.

जब मैं 400 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेती हूँ तो मैं बाईं ओर ही झुकाव लेती हूँ, मैंने 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ प्रतियोगिताओं में भी यही आदत बनाए रखी है.

(बीबीसी संवाददाता अनुराग शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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