'काम नहीं, तो वेतन नहीं' पर घिरे मंत्री

  • 4 अगस्त 2015
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Image caption संसद के सत्र में लगातार रूकावटें आ रही हैं.

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा का कहना है कि नौकरशाहों की तरह सांसदों पर भी 'काम नहीं, तो वेतन नहीं' की नीति लागू की जानी चाहिए.

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री शर्मा ने संसद में जारी गतिरोध के बीच के ये बात कही है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुद्दे पर विपक्ष संसद को नहीं चलने दे रहा है.

ऐसे में, महेश शर्मा के बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया है और विपक्ष ने सरकार से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है.

कांग्रेस ने उनके इस बयान को पूरी तरह 'ग़लत' बताया है, जबकि एक अन्य केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारामन का कहना है कि सरकार के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन इस बारे में चर्चा हो सकती है.

इसी मुद्दे पर बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने महेश शर्मा से बात की.

111 सांसद मेरी बात के पक्ष में: महेश शर्मा

मैं ये नहीं कहूंगा कि मेरे बयान से विवाद शुरू हो गया है. मैं कहूंगा कि चर्चा शुरू हो गई है.

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देश के 127 करोड़ लोग बड़े अरमानों से अपने सासंदों को संसद भेजते हैं. उनसे अपेक्षा करते हैं कि राष्ट्रहित के मुद्दे पर, हमारे विषयों पर चिंता करेंगे, बहस करेंगे, चर्चा करेंगे लेकिन वो देखते हैं कि आठ दिनों से संसद नहीं चल रही है.

ये गतिरोध तब है, जब विपक्ष की मांग के मुताबिक़ सरकार बहस के लिए तैयार है.

सरकार प्रश्नकाल में भी चर्चा के लिए तैयार हैं, समय तय कर भी चर्चा के लिए तैयार हैं. लेकिन उसके बाद भी विपक्ष का जो अड़ियल रवैया है, उससे एक अराजकता का माहौल पैदा होता है और ये कष्टदायक है.

वो लोग हर रोज़ वही प्लेकार्ड्स लेकर संसद में उतरते हैं.

मेरा मतलब ये नहीं था कि दो चार हज़ार रूपए कटें बल्कि ये पूरा मामला उजागर हो, हम ये बता सकें कि देश की जनता उन्हें देख रही है.

150 सांसदों का एक सर्वेक्षण किया गया है जिसमें 111 सांसदों ने मेरी बात का समर्थन किया है.

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