कितना सियासी है लुई बर्जर घूस कांड?

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लुई बर्जर रिश्वत कांड में गिरफ़्तार गोवा के पूर्व मंत्री चर्चिल अलेमाओ चार दिन के पुलिस रिमांड पर हैं.

पुलिस की अपराधा शाखा ने लोक निर्माण विभाग के पूर्व मंत्री को बुधवार रात उनके वार्षा स्थित घर से गिरफ़्तार कर लिया था.

गोवा में 2012 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद घूस से जुड़े मामलों में बड़े राजनेताओं और अधिकारियों की गिरफ़्तारी का यह पहला मामला है.

इस मामले में आरोप यह है कि अमरीका की न्यू जर्सी स्थित कंपनी लुइ बर्जर ने एक जल परियोजना का ठेका हासिल करने के लिए मंत्री को घूस दिया था.

लुइ बर्जर ने माना था कि उसने गोवा परियोजना से जुड़ा ठेका हासिल करने के लिए 9,76,630 डॉलर की रिश्वत दी थी.

इस मामले ने अचानक कई मोड़ आ गए. राज्य की भाजपा सरकार पहले चाहती थी कि इस मामले की जांच सीबीआई करे.

वहीँ पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से कथित तौर पर मिले संकेतों के बाद सरकार ने इस मामले की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है.

बर्जर ने रिश्वत कांड में शामिल भारतीय राजनेताओं और अधिकारियों के नाम उजागर नहीं किए हैं. लेकिन अमरीकी न्याय विभाग ने कहा है कि यदि भारत सरकार उनसे नाम मांगती है तो उसे यह नाम बता दिए जाएंगे.

भारत सरकार ने नाम जानने के लिए अब तक कोई क़दम नहीं उठाया है.

सीबीआई जाँच क्यों नहीं?

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रिश्वत कांड का मामला गोवा विधानसभा में 27 जुलाई को उठाया गया था. सत्ताधारी पार्टी के अधिकतर सांसदों ने मुख्यमंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए सीबीआई जांच की मांग की.

दूसरी ओर, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस मामले में पूर्व मंत्री चर्चिल अलेमाओ और पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत के शामिल होने के संकेत दिए.

जिस समय सीबीआई जाँच की मांग की जा रही थी, क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी. अब तक अलेमाओ समेत तीन लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

क्राइम ब्रांच ने 21 जुलाई को मामला दर्ज किया और गोवा स्थित जेआईसीए परियोजना के दफ्तर पर छापा मारा.

भारत में काम कर रहे लुइ बर्जर के दो अधिकारी भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए. इन अधिकारियों ने अपने बयान मे कहा कि पीडब्ल्यूडी के पूर्व चीफ़ इंजीनियर वाचसुंदर के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और पूर्व मंत्री अलेमाओ को भी घूस दी गई थी.

पुलिस ने अब तक उन अधिकारियों को गिरफ़्तार नहीं किया है.

वाचसुंदर को भाजपा सरकार ने 26 जुलाई को निलंबित कर दिया. छह दिन पुलिस हिरासत में गुजारने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

इसी बीच, गोवा पुलिस ने कामत और अलेमाओ को पूछताछ के लिए बुलाया.

जाँच में नया मोड़

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इसी दौरान पुलिस जाँच में एक नया मोड़ आया. वाचसुंदर ने अग्रिम ज़मानत की अपनी अर्जी 4 अगस्त को वापस ले ली और कामत ने अगले ही दिन गिरफ़्तारी से बचने के लिए अग्रिम ज़मानत की अर्जी दी.

कामत ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें फंसाने के लिए वाचसुंदर पर दबाव बनाया है. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार इस मामले में राजनीतिक विद्धेष की भावना से काम कर रही है.

पुलिस ने उसी रात यानी 5 अगस्त को अलेमाओ को गिरफ़्तार कर लिया.

कामत की अग्रिम ज़मानत की याचिका पर 7 अगस्त को सुनवाई होनी है.

इस बीच, मुख्यमंत्री परसेकर ने सीबीआई से जाँच कराने के मुद्दे पर अपना रुख़ अचानक बदल दिया. उन्होंने इस मामले में राजनीतिक बदले की भावना से इनकार किया और पुलिस की तारीफ़ की.

अलेमाओ की रिमांड क्यों?

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अलेमाओ की पुलिस रिमांड के लिए बहस करते हुए सरकारी वकील गुरुप्रसाद किरतानी ने कहा कि पानी आपूर्ति और सीवर परियोजना की फ़ाइल ग़ायब है. लिहाज़ा, इसकी बरामदगी के लिए अलेमाओ से पूछताछ ज़रूरी है.

उन्होंने कहा कि पुलिस दल लुइ बर्जर के गुड़गांव दफ़्तर में दस्तावेज़ों की तलाश कर रहा है. पर इनके सत्यापन के लिए जाँचकर्ताओं को अलेमाओ की ज़रूरत है और इसलिए उन्हें रिमांड पर लिया गया है.

इस मामले में पुलिस लुइ बर्जर (भारत) के वाइस प्रेसिडेंट सत्यकाम मोहंती से भी पूछताछ कर रही है. मोहंती को 3 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था.

लुइस बर्जर पानी की आपूर्ति और सीवर परियोजनाओं में सलाह देने का काम करती है.

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