पोर्नोग्राफ़ी बैन और उससे जुड़े 7 सवाल

  • 8 अगस्त 2015
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भारत में मोदी सरकार ने पोर्न साइटों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है.

हालांकि इन साइटों की संख्या काफ़ी सीमित है, लेकिन इस फ़ैसले से ख़ासा विवाद पैदा हो गया है.

एक सवाल यह भी है कि ऐसी सामग्रियों को ब्लॉक करने के लिए जिस बुनियादी ढांचे की ज़रूरत होती है, क्या वो भारत के पास है?

आईए, भारत में पोर्नोग्राफ़ी को सात बिंदुओं में समझते हैं.

1 - क्या पोर्न पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना तकनीकी रूप से मुमिकन है?

इंटरनेट पर किसी भी चीज पर प्रतिबंध लगाना बेहद मुश्किल है, ख़ासकर पोर्नोग्राफ़ी. ऐसा इंटरनेट के स्वरूप के कारण है.

हाल ही में भारत सरकार ने 857 साइटों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया, जबकि इंटरनेट पर दसियों लाख पोर्न साइटें मौजूद हैं.

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लेकिन इस प्रतिबंध के बावजूद इन 857 साइटों को खोलने के कई तरीक़े हैं.

सामग्रियों को असरदार तरीक़े से प्रतिबंधित करने के लिए 'फ़ायर वॉल' की ज़रूरत पड़ती है. यह एक ऐसा सिस्टम है जो इंटरनेट नेटवर्क पर निगरानी रखने और उन पर नियंत्रण करने के लिए बना है.

निजी कंपनियों के लिए तो इसका इस्तेमाल करना आम बात है, लेकिन पूरे देश के स्तर पर इसे लागू करना बहुत कठिन है.

सिंगापुर और चीन जैसे कुछ देशों में सरकारी फ़ायर वॉल इस्तेमाल किए जाते हैं.

अगर वाकई ऐसी सामग्रियों पर असरदार प्रतिबंध लगाना है तो इसके लिए सरकार को सेंसरशिप टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश करना होगा. अभी तक कुछ ही देश ऐसा कर पाए हैं, हालांकि कई दूसरे मुल्कों ने इसका प्रयास किया है.

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चीन इसमें कामयाब है. जन सुरक्षा मंत्रालय एक दशक पुराना ‘ग्रेट फ़ायर वॉल’ चलाता है.

इसे गोल्डेन शील्ड प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है. चीन नुक़सानदायक समझी जाने वाली सामग्रियों को ब्लॉक करने के लिए दर्जन भर तकनीकों का इस्तेमाल करता है.

2- क्या चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी और एडल्ट पोर्नोग्राफ़ी में अंतर करने का तरीक़ा है?

चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी को पहचानने का कोई आसान और ऑटोमेटिक तरीक़ा नहीं है. असल में यह काम इतना कठिन है कि अगर चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी के लिए पुलिस किसी संदिग्ध को पकड़ भी लेती है तो उसके कंप्यूटर या नेटवर्क पर तस्वीरें ढूंढना बेहद मुश्किल है.

ऐसा इसलिए है क्योंकि तस्वीरों को नुक़सानदेह नहीं माना जा सकता और ये कहीं भी पाई जा सकती हैं.

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हालांकि एनकेस जैसी अत्याधुनिक फ़ारेंसिक जांच से तस्वीरों के रंग, रूप और बनावट के आधार पर विश्लेषण करना मुमिकन है. यह कुछ हद तक सफल भी है.

की (key) बोर्ड आधारित फ़िल्टर की तरह ही, इंटरनेट ट्रैफ़िक के लिए आईएसपी के ज़रिए इस तरह के टूल को इस्तेमाल करना मुश्किल है.

आम तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला तरीक़ा किसी साइट को ब्लैक लिस्ट करना है. ब्रिटेन का इंटरनेट वॉच फ़ाउंडेशन ऐसा ही करता है.

इसे मानना इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) की इच्छा पर निर्भर है. क़ानून के तहत कोई आदेश हो या उपभेक्ताओं की शिकायतें हों तो इस तरह के साइटो को ब्लॉक किया जा सकता है.

ऐसा फ़ेसबुक और ट्विटर के मामलों में किया जाता है.

3 - भारत में इंटरनेट पर पोर्नोग्राफ़ी शेयर करने का आधिकारिक आंकड़ा है?

किसी साइट पर मौजूद सामग्री क्या पोर्न है, इसे पहचानने और इसका विश्लेषण करना बेहद मुश्किल है. इस वजह से इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है.

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर खास साइटों पर ट्रैफ़िक की पहचान कर सकते हैं. इसी वजह से 2014 के अंत में यह बात सामने आई थी कि पोर्न साइटों पर लोगों के जाने के मामले में भारत पूरी दुनिया में पांचवें स्थान पर था, जबकि अमरीका अव्वल था.

पोर्नहब साइट पर आने वाले भारतीयों में एक चौथाई संख्या महिलाओं की थी.

4 - इंटरनेट पर पोर्नोग्राफ़ी शेयर करने का कोई आधिकारिक आंकड़ा या अनुमान है?

कुछा ताज़ा आंकड़े हैं, जिनपर कम ही भरोसा किया जा सकता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में किए गए अनुमान के मुतबिक़ कुल इंटरनेट ट्रैफ़िक का 30 प्रतिशत हिस्सा पोर्न है.

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आज वास्तविक आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है, क्योंकि आज अधिकांश पोर्न वीडियो के रूप में है. वीडियो में बैंडविड्थ का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करता है.

बैंडविड्थ के इस्तेमाल पर 2013 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, कुल बैंडविड्थ इस्तेमाल का 30 प्रतिशत हिस्सा पोर्न में होता है.

5 - पोर्नोग्राफ़ी सर्च के दौरान भारतीय सबसे अधिक क्या खोजते हैं?

पोर्नहब साइट के मुताबिक़, भारत में खोजे जाने वाले सबसे शीर्ष पांच शब्द थे - सनी लियोनी, इंडियन, लिज़ाएन, इंडियन वाइफ़ और इंडियन भाभी.

दिलचस्प बात है कि ऑनलाइन पर कुछ साधारण शब्द भी पोर्न से जुड़ गए हैं. उदाहरण के लिए गूगल इमेज पर aunty (जो कि ब्रिटिश auntie से अलग है) शब्द खोजने पर अधिकांश तस्वीरें अंग प्रदर्शन करती महिलाओं की मिलेंगी.

6 - क्या पता लगाना मुमकिन है कि कितनी सामग्री मोबाइल से और कितनी दूसरे माध्यमों से सर्च की जाती है?

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पोर्नहब के मुताबिक़, इस साइट पर जाने वाले आधे भारतीय उपभोक्ता अपने स्मार्टफ़ोन से सर्च करते हैं.

स्मार्ट फ़ोन पर यह बदलाव और ज़्यादा होने वाला है. सच यह है कि 90 फ़ीसदी भारतीय इंटरनेट यूज़र और 85 प्रतिशत ब्रॉडबैंड यूज़र मोबाइल वाले हैं.

भारत में पोर्न देखने का सबसे आम तरीक़ा है, ख़ासकर ग़रीब उपभोक्ताओं और फ़ुटपाथ के बच्चों में, एक दूसरे के माइक्रो एसडी कार्ड को साझा करना.

कुछ अनुमानों के मुताबिक़, अगर दिहाड़ी मज़दूर पोर्न देखता है तो वो इस पर अपनी कमाई का एक तिहाई हिस्सा ख़र्च कर देता है.

आईएएनएस की 2013 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दिल्ली में फ़ुटपाथ पर रहने वाले और रोज़ाना 150 से 200 रुपए कमाने वाले बच्चे पोर्न वीडियो पर 50 रुपए ख़र्च करते हैं.

7 - किस देश में सबसे ज़्यादा पोर्नोग्राफ़ी देखी जाती है और भारत की स्थित क्या है?

हालांकि इस बारे में किसी स्वतंत्र एजेंसी का कोई विश्वसनीय आंकड़ा नहीं है, सिवाय पोर्नहब जैसी कुछ साइटों के.

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गूगल का आंकड़ा दिखाता है कि आठ सबसे अधिक पोर्न सर्च करने वाले देशों में छह मुस्लिम देश हैं.

इस सूची में पाकिस्तान शीर्ष पर है, इसके बाद मिस्र है. ईरान, मोरक्को, सउदी अरब और तुर्की क्रमशः चौथे, पांचवे, सातवें और आठवें नंबर हैं.

पोर्न सर्च के मामले में पाकिस्तान अनूठा देश है, जहां जानवरों के पोर्न को सूअर, गधा, कुत्ता, बिल्ली और सांप के नाम पर खोजा जाता है.

पोर्नएमडी के एक शोध के मुताबिक़, इराक़ और सीरिया में सर्वाधिक सर्च किए जाने वाले शीर्ष 10 शब्दों में ‘ब्लोजॉब’ शामिल है.

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