आसान हुआ अब बैंक बंद करना

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों की ऑथराइज़ेशन पॉलिसी में कुछ बदलाव किए हैं. इससे बैंकों को कामकाज में पहले से ज़्यादा छूट मिेलेगी.

इन बदलावों के बाद बैंकों को शाखाअों के विलय, शाखा बंद करने, शाखा का पता बदलने, एक्सटेंशन काउंटर खोलने और रिपोर्टिंग करने के मामले में अधिक स्वायत्तता मिलेगी.

अगस्त 6, 2015 को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि बैंक अपनी मर्ज़ी से अपना पता बदल सकते हैं, शाखाओं का विलय कर सकते हैं और कुछ या सभी शाखाएं बंद कर सकते हैं.

लेकिन ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में केवल एक ही शाखाअों वाले बैंकों पर ये लागू नहीं होंगे.

इसके लिए ज़िला कंसलटेटिव कमिटी या ज़िला स्तरीय रिव्यू कमिटी से इजाज़त लेनी होगी. आरबीआई का कहना है कि ऐसा करते वक़्त केंद्रीय ब्रांच में हो रहे काम की तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि कहीं भी काम में रुकावट न हो.

उपभोक्ताओं पर ध्यान

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Image caption आरबीआई गवर्नर, रघुराम राजन

आरबाआई की अधिसूचना के मुताबिक़, बैंकों को शाखाओं के विलय करने, शाखा बंद करने या किसी शाखा का पता बदलने के पहले उपभोक्ताओं की ज़रूरतों का ध्यान रखना होगा. पहले से इसकी सूचना देना ज़रूरी है.

यह भी ज़रूरी है कि बैंक हर हाल में सरकारी योजनाओं और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम को लागू रखेेंगे.

बैंक की शाखाओं को कम जनसंख्या वाली जगहों पर ले जाया जा सकता है.

जगह की कमी या किराये की समस्या से निपटने के लिए बैंक अपने कुछ काम दूसरी जगह भी शिफ्ट कर सकते हैं.

इसके लिए आरबीआई की पूर्व अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी.

एक्सटेंशन काउंटर

इससे पहले किसी भी संस्था में एक्सटेंशन शाखा खोलने के लिए ज़रूरी था कि वह बैंक उस संस्था का मुख्य बैंकर हो या वहां के मुख्य बैंकर से एनओसी लिया हुआ हो.

लेकिन अब एक्सटेंशन काउंटर खोलने के लिए इसकी ज़रूरत नहीं रहेगी.

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