मानसून सत्र में सिर्फ़ 1 विधेयक पारित

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संसदीय कामकाज के हिसाब से हालिया मानसून सत्र अनुपयोगी साबित हुआ है. संसद में कई विधेयक पेश किए गए लेकिन सिर्फ़ एक ही विधेयक पारित हो पाया.

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक़, बीते पांच वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है.

मानसून सत्र के दौरान 11 विधेयकों को पारित किया जाना था, लेकिन सिर्फ़ दिल्ली हाईकोर्ट (संशोधन) विधेयक 2014 ही लोकसभा में पारित हो सका.

राज्यसभा ने इस विधेयक को पूर्ववर्ती सत्र में ही पारित किया था.

विधेयक जो हंगामें की भेंट चढ़ गए

हालांकि लोकसभा ने कुल चार विधेयक पारित किए लेकिन राज्यसभा में उनका रास्ता साफ़ नहीं हो पाया.

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इतना ही नहीं, दोनों सदनों में पहले दो हफ़्ते कुछ काम नहीं हुआ.

लोकसभा में थोड़ा कामकाम हुआ भी लेकिन राज्यसभा में कुछ भी काम नहीं हुआ.

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक़ राज्यसभा में बीते 15 वर्षों में ये दूसरा मौक़ा था जब संसदीय कामकाज शून्य रहा.

मानसून सत्र की शुरुआत के समय संसद के समक्ष कुल 65 विधेयक लंबित थे जिनमें से केवल 10 विधेयक ही सदन में पेश किए जा सके.

13 अगस्त को सत्र की समापन के समय लंबित विधेयकों की संख्या बढ़कर 68 हो चुकी थी.

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