कथक, मणिपुरी के बाद अपनाया ओडिसी

  • 15 अगस्त 2015
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प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना पद्मश्री रंजना गौहर पटकथा लेखक, कोरियोग्राफर और फ़िल्म निर्मात्री भी हैं.

उनका जन्म दिल्ली में हुआ, बचपन में कथक सीखने के बाद मणिपुरी नृत्य सीखा और ओडिसी नृत्य से साक्षात्कार होने पर उन्होंने अपना जीवन इसी नृत्य शैली को समर्पित कर दिया.

ओडिसी को देश भर में पहचान दिलाने के लिए उन्होंने दूरदर्शन के लिए ओडिसी नृत्य पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई ताकि देश के हर कोने में इस नृत्य को पहचान मिले.

उन्होंने अपनी किताब ओडिसी, 'द डांस डिवाइन' के जरिए ओडिसी नृत्य की बारीकियों को नृत्य लोगों तक पहुंचाया.

'ओडिसी' ओडिशा राज्य की एक शास्त्रीय नृत्य शैली है. इस शैली का जन्म मंदिर में नृत्य करने वाली देवदासियों के नृत्य से हुआ था.

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Image caption इस नृत्य शैली में त्रिभंग यानी सिर, शरीर और पैर तीन भागों पर ध्यान दिया जाता है. यह कोमल कवितामय शास्त्रीय नृत्य है.
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Image caption रंजना गौहर प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं. इन्हें पदमश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है.
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Image caption ये है ताहिया, जिसे नृत्यांगना जूड़े के ऊपर पहनती हैं. यह फूलों के मुकुट की तरह होता है. ताहिया सिर्फ पूर्वी ओडिसा में धर्म नगर पुरी में ही बनाया जाता है.
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Image caption रंजना का मानना है कि ओडिसी प्रेम ,सौंदर्य व भक्ति से परिपूर्ण कला है.
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Image caption ओडिसी नृत्य शैली में कोमल भाव भंगिमाएं हैं.
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Image caption भारतीय शिल्पकला से प्रभावित इस नृत्य शैली को प्रस्तुत करते हुए, नृत्यांगना किसी अप्सरा सा प्रभाव डालती है.
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Image caption उत्सव नाम से रंजना गौहर की डांस कंपनी में हर उम्र के विद्यार्थी ओडिसी सीखने आते हैं. रंजना गौहर अपनी निगरानी में शिष्यों को ओडिसी की बारीकियां सिखाते हुए.
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Image caption ओडिसी नृत्य में आभूषण विशेष प्रकार के होते हैं और इस नृत्य शैली का महत्वपूर्ण अंग हैं.
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Image caption गुरु के तौर पर वो इस बात को लेकर बहुत सजग रहती हैं कि उनके विद्यार्थी इस खास नृत्य शैली की गंभीरता को समझें.

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