सोनिया-राहुल ख़ामोश, लेकिन अन्य नेता गरजे

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स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ख़ामोश रहे, वहीं अन्य नेताओं ने आलोचना करने का ज़िम्मा संभाला.

सोनिया गांधी ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में झंडा फहराया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर कुछ नहीं कहा.

हाल के दिनों में नरेंद्र मोदी पर वार करने का कोई मौक़ा न गँवाने वाले राहुल गांधी ने फ़िलहाल कुछ कहने से इनकार किया. उन्होंने कहा, "ये दिन राजनीति का नहीं है. हम कल (रविवार) को बात करेंगे."

लेकिन कांग्रेस के अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण में जिन योजनाओं का ज़िक्र किया, वो यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी. इन नेताओं ने ये भी आरोप लगाया कि उनकी भ्रष्टाचार की परिभाषा भी अलग है, एक राजनीतिक विरोधियों के लिए और एक अपने नेताओं के लिए.

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की दस बातें

राज्य सभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "उन्होंने नया क्या कहा है. उन्होंने दो-तीन योजनाओं की चर्चा की. लेकिन मुझे ये कहते दुख हो रहा है कि इन योजनाओं की शुरुआत कांग्रेस ने यूपीए सरकार के दौरान की थी."

'भ्रष्टाचार पर ख़ामोशी क्यों'

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कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि वे अपने मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मामलों में शांत हैं.

अंबिका सोनी ने कहा, "हम लगातार ये कहते रहे कि अगर राज्य सभा में गतिरोध ख़त्म करना चाहते हैं तो प्रधानमंत्री आएँ और इसे स्पष्ट करें कि वे ललित मोदी से जुड़े मामलों और व्यापमं के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं. लेकिन वे आए नहीं औ न हीं उन्होंने अपना मुँह खोला."

उन्होंने आरोप लगाया कि एकाएक 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ये कहते हैं कि कोई भ्रष्टाचार नहीं है. कोई भी इस पर भरोसा नहीं करेगा.

अंबिका सोनी ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुरदासपुर और उधमपुर में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की मौत पर दुख नहीं जताया और न ही आतंकवाद पर बात की.

कांग्रेस के एक अन्य नेता आनंद शर्मा ने कहा, "मैं नहीं जानता कि प्रधानमंत्री और भाजपा की भ्रष्टाचार की परिभाषा क्या है."

पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री 'वन रैंक वन पेंशन' पर अपने वादे से पीछे हट रहे हैं.

जबकि पूर्व कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने आरोप लगाया कि कोयले खदान पर बोली लगाने की प्रक्रिया यूपीए सरकार ने शुरू की थी.

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