दयानिधि मारन की मुसीबतों का अंत नहीं

  • 16 अगस्त 2015
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पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन को ग़ैरक़ानूनी टेलीफ़ोन एक्सचेंज मामले में गिरफ़्तारी से सुप्रीम कोर्ट से फ़ौरी राहत भले ही मिल गई हो लेकिन उनकी मुसीबतें ख़त्म नहीं हुई हैं.

मारन बंधुओं का निजी और राजनीतिक भविष्य डीएमके के साथ जुड़ा हुआ है, जिसके सितारे गर्दिश में हैं और वो खुद एआईडीएमके से मुक़ाबला करने के लिए ज़मीनी स्तर पर गठबंधन करने के लिए किसी पार्टी की तलाश में है.

वहीं आय से अधिक संपत्ति के मामले में जयललिता के बरी होने के बाद एआईएडीएमके तेज़ी से आगे बढ़ रही है. सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट का सवाल

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में 14 सितंबर तक दयानिधि मारन की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फ़ैसले को ख़ारिज करने के पहले सीबीआई अधिकारियों से जो सवाल पूछे, उससे डीएमके को उम्मीद की किरणें दिखती हैं.

मारन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सीबीआई उन्हें परेशान कर रही है और उन्हें सिर्फ़ अपमानित करने के लिए उनकी ज़मानत याचिका निरस्त करवाना चाहती है. इसी नीयत से वह उन्हें गिरफ़्तार भी करना चाहती है.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा था कि उसने उत्तर प्रदेश में हुए 8,000 करोड़ रुपए के घोटाले में किसी को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया जबकि वह मारन की ज़मानत याचिका रद्द करवाना चाहती है?

मामले और भी हैं

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यह साफ़ है कि डीएमके प्रमुख करुणानिधि के पोते मारन को फ़िलहाल राहत तो मिल गई, लेकिन क़ानूनी तौर पर उन्हें इस तरह के कई दूसरे मामलों से निपटना है.

वे एअरसेल-मैक्सिस मामले में सह-अभियुक्त हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का अनुचित इस्तेमाल कर एअरसेल के मालिकों को इसके लिए मजबूर किया कि वे अपनी कंपनी मैक्सिस समूह को बेच दें.

सीबीआई ने मारन बंधुओं की 740 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त कर ली और उन पर काले धन को वैध बनाने के मामले में मुक़दमा दायर कर दिया.

मनी लॉन्डरिंग का मामला

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सीबीआई ने यह आरोप भी लगाया कि मारन भ्रष्टाचार करने और साजिश रचने में शामिल थे. उन पर आरोप है कि एअरसेल ख़रीदने में मैक्सिस की ग़ैरक़ानूनी ढंग से मदद करने के एवज में उन्होंने उससे 700 करोड़ रुपए ले लिए.

मारन पर यह आरोप भी है कि उन्होंने इस पैसे का एक हिस्सा अपने भाई कलानिधि मारन के सन टीवी समूह में लगाया.

डीएमके के राजनीतिक परिवार का अधिक परिष्कृत चेहरा माने जाने वाले मारन बंधुओं की राजनीति यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद औंधे मुंह गिरी.

डीएमके ने समय से एक साल पहले 2013 के मार्च में ही यूपीए सरकार से अपना समर्थन ले लिया था.

पार्टी को धक्का

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234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में इसके सदस्यों की तादाद घट कर 23 रह गई है. इसका बड़ा कारण 2जी घोटाले और उसमें ए राजा की भूमिका की वजह से पार्टी की ख़राब हुई छवि है.

मुसीबत दयानिधि मारन पर ही आई, जिन्होंने अपने राजनीतिक रसूख और दूरसंचार मंत्री के रूप में अपनी क्षमता का इस्तेमाल ख़ुद को और अपने परिवार को समृद्ध बनाने में किया.

पर पार्टी सदस्यों का एक तबका मानता है कि ए राजा की तरह ही भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर ख़ुद दयानिधि मारन की वजह से भी पार्टी की छवि को धक्का लगा.

आम जनता की याददाश्त कितनी छोटी है और 2014 के आम चुनाव और 2011 के विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार से जिस तरह डीएमके को जोड़ा गया, वह उससे कैसे बाहर निकलेगी, यह वक़्त ही बताएगा.

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