भारतीय बाबा: आध्यात्मिकता के 'दलाल'

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Image caption राधे माँ

भारतीय बाबा आध्यात्मिकता के 'दलाल' होते हैं. वो ऐसे बिचौलिए हैं जो आधुनिक जीवनशैली के तनाव को बखूबी समझते हैं.

वो इस बात को भी बखूबी समझते हैं कि आम लोगों को आध्यात्मिकता से ज़्यादा सुरक्षाबोध और भरोसे की ज़रूरत होती है. लोगों को हर चीज़ तुरत-फुरत चाहिए.

आध्यात्मिकता के मामले में भारतीय बाबा रहस्यमयी, मायावी, अबूझ और महत्वाकांक्षी होते हैं. वो धार्मिक गुरु से ज़्यादा कॉरपोरेट मैनजेर लगते हैं. वो हर समस्या का चट-पट निदान बताते हैं.

वो आध्यात्मिकता को मंत्र, झाड़-फूंक, टोने-टोटके, ताबीज़, पवित्र प्रसाद इत्यादि के रूप में पेश करते हैं.

जब आपका कारोबार ख़तरे में हो, बीमारी का डर हो, भविष्य अनिश्चित हो, तो ज्योतिषी की सलाह और टोना-टोटका आपको फौरी राहत देते हैं, जो आध्यात्म शायद न दे सके.

सबके लिए उपलब्ध

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Image caption बाबा राम रहीम

धार्मिक गुरु और स्वामी हमेशा ही रहस्य में घिरे होते हैं लेकिन बाबाओं में एक तरह की लुभावनी जनसुलभता होती है. वो ज़्यादा जादुई लगते हैं. वो चमत्कारी भी दिख सकते हैं.

वो रोज़मर्रा के जीवन का मनोविज्ञान समझते हैं. वो बिगड़ी हुई क़िस्मत से लेकर बिगड़े हुए राजनीतिक समीकरणों को दुरुस्त करने का सबसे सरल रास्ता होते हैं.

धार्मिक मामलों के साथ ही सत्ता समीकरण में भी उनकी गहरी पैठ होती है.

आम लोगों के लिए वो हमेशा उपलब्ध होते हैं. इसलिए वो कई बार लोकतांत्रिक नज़र आते हैं. फिर भी वो परंपरा की दुहाई देते हैं और उसकी ताक़त का बहुत ही प्रभावशाली इस्तेमाल करते हैं.

जब आपकी पत्नी बीमार हों या चुनाव में आपको हार का मुँह देखना पड़े, तो इनकी धर्मनिरपेक्ष व्याख्या पर्याप्त नहीं होती.

भारतीयों को पता है कि भाग्य कई बार धर्मनिरपेक्ष व्याख्याओं को चकमा दे जाता है. वो आधुनिक टेक्नॉलॉजी और जादू-टोने का एक साथ प्रयोग करना चाहते हैं.

उम्मीदों को पंख

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Image caption आसाराम बापू

बाबा आम लोगों में दोहरा भरोसा जगाते हैं. वो उनकी उम्मीदों को पंख देते हैं.

वो हज़ार साल में पैदा होने वाले महानायक नहीं हैं, जो महान घटनाओं का इंतज़ार करें. उनके वादों का तुरंत असर करना ज़रूरी है.

तेज़ रफ़्तार दुनिया में तुरंत डिलिवरी करने की ज़रूरत होती है. अगर बाबा न हों तो आधुनिकता भी बेबस दिखने लगेगी.

विचारधारओं और राजनीतिक कार्यक्रमों की माहिर राजनीतिक पार्टियों के पास इतनी ताक़त नहीं कि इनके बिना काम चला सकें.

उन्हें लगता है कि अगर बाबा का आशीर्वाद रहा तो सफलता मिलने की गारंटी ज़्यादा होगी. राजनेताओं को लगता है कि अगर बाबा साथ हैं तो उनके पास एक अतिरिक्त हथियार है.

बाबा का आशीर्वाद वो दोहरा कवच है जिससे सत्ताधारियों को भी अपनी शक्ति के मुकम्मल होने के अहसास होता है.

लोकप्रियता बढ़ेगी

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Image caption योगी आदित्यनाथ और बाबा रामदेव

ग्लोबलाइजेशन के साथ बढ़ते असंतोष के दौर में बाबाओं की लोकप्रियता बढ़ती ही जाएगी.

वो राजनीतिक दलों का हिस्सा बनते जा रहे हैं. सार्वजनिक जीवन में जोखिम के अंदेशे जितने बढ़ेंगे, बाबाओं का प्रभाव भी उतना ही बढ़ेगा.

आख़िरकार जटलिताओं के इस दौर में वैज्ञानिक विशेषज्ञों का भी भरोसा कई बार डिग जाता है.

जटिलताओं के इस दौर में बाबा हमें भरोसा, सुरक्षा देते हैं और आश्वस्त करते हैं. उनके आशीर्वाद से प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल की जा सकती है.

उनका आपके आसपास होना, आपकी पार्टी में उनकी मौजदूगी आप में एक ऊर्जा भर देती है. उनकी मौजदूगी से आपकी सफलता की संभावना असीमित तरीके से बढ़ जाती है.

मेरी तो ख़्वाहिश है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पास भी एक बाबा होना चाहिए. फिर तो भारतीय टीम विश्व क्रिकेट में धमाल मचा देगी.

हाशिए से केंद्र की तरफ़

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Image caption रामपाल बाबा

अब बाबाओं को भी अपनी ताक़त का अहसास हो गया है. इसलिए वो हाशिए से केंद्र की तरफ़ बढ़ रहे हैं.

भाजपा, कांग्रेस और कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में भी वो धार्मिक ग्रंथों के उद्धरण देते, लोककथाएं सुनाते, मैनेजमेंट की नई अवधारणा पेश करते, यहाँ तक नीतियाँ बनाते नज़र आ सकते हैं.

सच तो ये है कि कुछ साल पहले बाबाओं को राजनेताओं के महज सहयोगी के तौर पर जाने जाते थे. अब उन्होंने अपना अलग स्वतंत्र व्यक्तित्व तैयार कर लिया है.

उनकी मौजूदगी ही उनकी ताकत का अहसास कराने के लिए काफ़ी है.

पहले बाबाओं की संगत से नेताओं की ताकत बढ़ती थी अब नेताओं की संगत से बाबाओं का प्रभुत्व बढ़ता है. और इसी में राजनीति की नई संभावनाएँ छिपी हैं.

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