उपहार कांड: अंसल भाइयों नहीं जाना होगा जेल

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सुप्रीम कोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड मेंं अंसल भाइयों को जेल भेजे जाने से रियायत दे दी है, हालांकि उन्हें दिल्ली सरकार को 30-30 करोड़ रुपए का हर्जाना देना होगा.

अदालत ने कहा कि ये हर्जाना दिल्ली सरकार को तीन महीनों के भीतर अदा करना होगा.

13 जून, 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में 'बॉर्डर' फिल्म के प्रदर्शन के दौरान आग लग गई थी जिसमें 59 लोग मारे गए और सौ से ज़्यादा घायल हो गए थे.

अदालत ने सिनेमा के मालिकों गोपाल अंसल और सुशील अंसल को मामले में दोषी ठहराते हुए हर्जाना देने का आदेश दिया है.

हालांकि पीड़ितों के वकील ने अंसल बंधुओं को जेल भेजे जाने की अपील की थी.

क़ानूनी लड़ाई

दिल्ली की एक अदालत ने नवंबर 2007 में अंसल भाइयों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2008 में इसे घटाकर एक-एक साल कर दिया था.

अंसल बंधु दोषमुक्त किए जाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट गए थे.

मार्च, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अंसल भाइयों को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया था.

हालांकि अंसल बंधुओं को दी जाने वाली सज़ा की अवधि पर दो न्यायाधीशों की खंडपीठ की राय अलग-अलग थी.

तब सजा की अवधि का मसला तीन जजों की खंडपीठ को सौंप दिया गया.

मारे गए लोगों के परिजनों ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था. इसके बाद दिल्ली सरकार, अंसल बंधु, सिनेमाघर के मालिक के ख़िलाफ़ मामले दर्ज हुए थे.

उपहार अग्नि कांड को भारत के सबसे भीषण हादसों में एक माना जाता है.

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