पुरंदरे को महाराष्ट्र भूषण देने पर विवाद क्यों?

बलवंत मारेश्वर पुरंदो को महाराष्ट्र भूषण सम्मान से नवाज़ते महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव. इमेज कॉपीरइट MAHARASHTRA RAJ BHAVAN

छत्रपति शिवाजी पर लंबे समय से काम कर रहे इतिहासकार बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे या बाबासाहेब पुरंदरे को महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार देने पर पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में राजनीति खू़ूब गरमाई हुई है.

महाराष्ट्र भूषण सम्मान महाराष्ट्र सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है.

उन्हें ये सम्मान देने के ख़िलाफ़ दायर याचिका ख़ारिज हो गई है और उन्हें बुधवार को इस सम्मान से नवाज़ा गया.

पुरंदरे से पहले ये सम्मान पाने वालों में साहित्यकार पु. ल. देशपांडे, मशहूर गायिका लता मंगेशकर, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और गायक पं. भीमसेन जोशी शामिल हैं.

कौन हैं बाबासाहब पुरंदरे?

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बाबासाहब पुरंदरे का जन्म 29 जुलाई 1922 को पुणे में हुआ था.उन्होंने 17 साल की उम्र में शिवाजी के जीवन पर कहानियाँ लिखीं.

ये कहानियाँ ‘ठिणग्या’ (चिंगारियां) नाम की किताब के रूप में छपीं. इसके बाद उन्होंने शिवाजी पर ‘राजा शिव छत्रपति’ और नारायण राव पेशवा पर ‘केसरी’ नाम की किताबें लिखीं.

शिवाजी पर आधारित उनका नाटक ‘जाणता राजा’ काफ़ी मशहूर है. मूल रूप से मराठी में लिखे इस नाटक का हिंदी में भी अनुवाद हुआ है.

क्या है विवाद?

बाबा साहब पुरंदरे पर आरोप है कि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के चरित्र और उनकी जिंदगी पर विवादस्पद लेखन किया.

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उन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने शिवाजी के गुरु कहे जाने वाले दादोजी कोंडदेव के बारे में झूठी जानकारी दी.

आरोप ये भी है कि उन्होंने जो लिखा उससे छत्रपति शिवाजी और उनके पिता शाहजी महाराज और माता जीजाबाई के सम्मान को ठेस पहुंची है.

क्या है इस विवाद की राजनीति?

पुरंदरे के समर्थकों का कहना है कि उनके विरोध के पीछे उनका ब्राह्मण होना भी एक वजह है.

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उनके समर्थकों का ये भी कहना है कि शिवाजी के इतिहास को लोगों तक पहुँचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है.

हालांकि उन्हें सम्मान का विरोध करने वालों का कहना है कि विरोध का एकमात्र कारण वो ग़लत बातें हैं जो उन्होंने अपने साहित्य में शिवाजी को लेकर लिखी हैं.

कौन कर रहा है विरोध?

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक जीतेंद्र आव्हाड, संभाजी ब्रिगेड, साहित्यकार और समाजसेवियों ने पुरंदरे को पुरस्कार देने का कड़ा विरोध किया है.

कौन समर्थन में?

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, शिव सेना और कुछ साहित्यकार और इतिहासकार पुरंदरे के समर्थन में मैदान में आए है.

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