बिना हवाई जहाज़ वाले हवाई अड्डे

  • 20 अगस्त 2015
राजस्थान के जैसलमेर में स्थित हवाई अड्डा. इमेज कॉपीरइट Reuters

राजस्थान के जैसलमेर में 111 करोड़ रुपए की लागत से बने हवाई अड्डे को आज भी यात्रियों और विमानों का इंतज़ार है. इसे बने हुए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है.

इस हवाई अड्डे को हर साल तीन लाख से अधिक यात्रियों के आवागमन को ध्यान में रखकर बनाया गया था. यहां 180 सीटों वाले तीन विमानों के पार्किंग की भी सुविधा है.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ देश में इस तरह के आठ हवाई अड्डों पर साल 2009 के बाद से 326 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. लेकिन इनको एक भी शेड्यूल्ड फ़्लाइट नहीं मिली है.

भारत में इस तरह के हवाई अड्डे बड़े पैमाने पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में बने. यूपीए सरकार ने इस तरह के 200 हवाई अड्डे बनाने की योजना बनाई थी.

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इसका मकसद हवाई यात्रा को बढ़ावा देना और दूर-दराज के पर्यटक स्थलों को जोड़ना था.

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भारत में सौ से अधिक अंतरराज्यीय हवाई अड्डे का संचालन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया करती है. उनमें से आधे से अधिक पर इस साल कोई शेड्यूल उड़ान नहीं हुई है.

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हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ कुछ पुराने हवाई अड्डों को शुरू में केवल चार्टेड प्लेन के लिए डिज़ाइन किया गया था.

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भारत में हवाई अड्डों का संचालन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया करती है. इस संस्था की वेबसाइट के मुताबिक़ देश में कुल 20 अतंरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं. इनमें से छह निजी क्षेत्र के हैं और दो सैन्य हवाई अड्डे हैं.

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एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ 44 अंतरराज्यीय हवाई अड्डों से विमानों का संचालन होता है जबकि 33 हवाई अड्डों से विमानों का संचालन नहीं होता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार में 27 सौ करोड़ रुपए की लागत से चार हवाई अड्डे बनाने की घोषणा की. बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

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