ज़्यादातर हुर्रियत नेताओं पर से पहरा हटा

वरिष्ठ हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी
Image caption वरिष्ठ हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी

भारत और पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत से पहले जिन हुर्रियत नेताओं को पुलिस निगरानी में रखा गया था, उनमें से ज़्यादातर पर से पहरा हट गया है.

लेकिन वरिष्ठ हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी की पुलिस निगरानी बरकरार है.

गुरुवार सुबह कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के घरों के बाहर पुलिस की टुकड़ियों को निगरानी के लिए तैनात कर दिया गया है ताकि वे अपने घर से बाहर ना निकल सकें.

माना जा रहा था कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अज़ीज़ से उनकी मुलाकात को रोकने के लिए ऐसा किया गया है.

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने सैयद अली गिलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़, यासीन मलिक और शब्बीर शाह को सरताज अज़ीज़ से मुलाकात का न्यौता दिया था.

भारत के सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और पाकिस्तान के एनएसए सरताज अज़ीज़ के बीच बातचीत के पहले इस मुलाकात का निमंत्रण दिया गया.

बातचीत के लिए राज़ी

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Image caption मोहम्मद यासीन मलिक

अपने कार्यकर्ताओं से लंबी बैठक के बाद सैयद अली गिलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और मोहम्मद यासीन मलिक ने बुधवार को औपचारिक तौर पर पाकिस्तान के इस न्योते को स्वीकार कर लिया.

सैयद अली गिलानी के प्रवक्ता अयाज़ अक़बर ने कहा, "सुबह हमें मुख्य दरवाज़े पर बड़ी तादाद में पुलिस देख कर अचंभा हुआ. पुलिसकर्मी सादी वर्दी में भी थे. वे हमें अपने दफ्तर और हमारे नेता के आवास से बाहर या अंदर जाने से रोक रहे थे. "

दिल्ली में अधिकारियों को लगता है कि कश्मीरी अलगाववादियों से 'सलाह' लेने के पाकिस्तान के इस कदम से दोनों देशों के बीच बातचीत पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. जबकि इस बातचीत का बहुत पहले से इंतज़ार किया जा रहा था.

द्विपक्षीय बातचीत में रुकावट

Image caption पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार सरताज अज़ीज़

अयाज़ अक़बर ने बताया, "हां, हमें न्यौता मिला है जिसके पक्ष में हमारी कार्यकारी समिति ने फैसला किया. सभी इस बातचीत के पक्ष में थे और हमने फैसला किया था कि सैयद गिलानी इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे."

पाकिस्तान का ये कदम दिल्ली के सभी मसलों को हल करने के लिए द्विपक्षीय बातचीत पर दृढ़ रहने के फैसले के सामने एक बड़ी रुकावट के तौर पर देखा जा रहा है.

दिल्ली में हुर्रियत कांफ्रेंस और पाकिस्तानी प्रतिनिधि के बीच ऐसी ही मुलाकात के कारण पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत रद्द कर दी गई थी.

पिछले महीने पाकिस्तानी दूतावास की ईद मिलन दावत का अलगाववादी नेताओं ने द्विपक्षीय बातचीत में कश्मीर की उपेक्षा करने के लिए बॉयकाट किया था.

उमर अब्दुल्लाह की टिप्पणी

Image caption जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

इस बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा है कि दोनों ही पक्ष इस बातचीत में बाधा डाल रहे हैं.

उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा है, "अगर केंद्र हुर्रियत नेताओं को सरताज अज़ीज़ से ना मिलने देने पर इतना दृढ़ था तो उन्हें नज़रबंद रखने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए थे."

अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, "मैंने कभी ऐसा भारत पाक संवाद नहीं देखा जहां दोनों पक्ष बातचीत को असफल करने के लिए इतना उत्सुक हों. भारत पाकिस्तान इस बातचीत को रद्द करने के लिए एक दूसरे से प्रतियोगिता कर रहे हैं."

उन्होंने आगे लिखा, "गोलाबारी, घुसपैठ, चरमपंथी हमले और अब हुर्रियत नेताओं की गिरफ्तारी, ज़ाहिर है कोई भी पक्ष बातचीत नहीं करना चाहता और फिर भी दोनों में से किसी में भी बातचीत को रद्द करने का साहस नहीं."

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