भारत-पाक बातचीत अब 'महीनों संभव नहीं'

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भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक जिस तल्खी के साथ रद्द हुई है, उससे अब जल्द दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना नहीं दिखती.

पाकिस्तान ने यह कह बैठक रद्द कर दी कि वह भारत की शर्तों पर बातचीत नहीं करेगा.

भारत इस बातचीत को 'आंतकवाद पर ही केंद्रित' रखना चाहता था और इसके एजेंडे में कश्मीर मुद्दे को शामिल करने को वो तैयार नहीं था.

वहीं पाकिस्तान को ये बात मंजूर नहीं थी. यहीं नहीं, कश्मीरी अलगाववादियों से मिलने की पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज की योजना पर भी भारत को सख़्त आपत्ति थी.

दोनों देशों के बीच पैदा हुए कूटनीतिक गतिरोध पर बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह ने बात की वरिष्ठ पत्रकार सिद्दार्थ वरदराजन से.

कैसे बढ़ेगी बातचीत?

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को भारत का रूख साफ़ कर दिया.

उन्होंने साफ़ शब्दों में पाकिस्तान से कहा कि आप इन दो मुद्दों पर मानेंगे तो बातचीत होगी, वर्ना नहीं होगी.

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने रूस के उफ़ा में बातचीत को जारी रखने पर सहमति जताई थी, लेकिन वो कोशिश बहुत जल्द रुकती दिख रही है.

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दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होना ज़रूरी है. ज़ाहिर है, रिश्ते सामान्य होने के लिए सबसे पहले चरमपंथ पर रोक ज़रूरी है.

फिर भी मेरा मानना है कि अगर पाकिस्तान चरमपंथ पर बैठक के मौक़े पर कुछ और मुद्दे उठाता है तो भारत को उनका जवाब देना चाहिए.

उसके लिए बैठक को रद्द करवाना सही नहीं होगा.

सुषमा स्वराज और सरताज अज़ीज़ ने शनिवार को जो बातें मीडिया के सामने कहीं, उन्हें बंद कमरे में दोनों देशों के बीच साझा किया जाता तो बेहतर होता.

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इससे इतना ज़रूर हुआ कि भारत और पाकिस्तान की जनता को भी पता चल गया कि दोनों देशों के बीच किन मुद्दों पर मतभेद हैं.

लेकिन जिस तरह से दोनों देशों ने लकीरें खींची हैं, उसके बाद आगे कैसे बातचीत होगी ये बहुत बड़ी समस्या होगी.

मुझे लगता है कि अब दोनों देशों के बीच कई हफ़्तों, कई महीनों तक बातचीत मुमकिन नहीं है.

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