बिहार चुनावः जदयू दे रही है 'घर-घर दस्तक'

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Image caption अखिलेश्वर सिंह अपने परिवार के साथ

अखिलेश्वर सिंह और उनके घरवालों के ज़हन में दो जुलाई का दिन एक यादगार तारीख के रूप में दर्ज हो गया है. करीब दो महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी दिन उनके घर आए थे.

अखिलेश्वर पटना सिटी के बेलवरगंज मोहल्ले में रहते हैं. यहीं से दो जुलाई को नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के ‘हर घर दस्तक’ अभियान की शुरुआत की थी.

उस दिन नीतीश कुमार ने मोहल्ले के करीब 20 घरों में जाकर आगामी विधानसभा चुनाव में अपने लिए समर्थन मांगा था.

अखिलेश्वर सिंह बताते हैं, ‘‘खबर थी कि नीतीश मोहल्ले में आएंगे, उनके आने का मकसद भी पता था लेकिन मेरे घर भी पहुंचेंगे इसका अंदाजा नहीं था.’’

वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री का उनके घर पर आना, आम लोगों के यहां जाना एक बड़ी बात है.

अभियान

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दो जुलाई को पूरे बिहार में 10 हजार जगहों पर एक साथ यह अभियान शुरू हुआ था.

इसके तहत जदयू ने एक करोड़ घरों और लगभग तीन करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है.

इसके तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर बिहार के विकास से जुड़े चंद सवालों के साथ नीतीश कुमार के लिए समर्थन मांग रहे हैं.

सवालों के बाद उस घर पर एक स्टीकर लगाकर कार्यकर्ता अगले घर की ओर बढ़ जाते हैं. स्टीकर पर लिखा होता है, ‘आगे बढ़ता रहे बिहार, फिर एक बार नीतीश कुमार’.

हर जदयू कार्यकर्ता से कम-से-कम दस घरों में दस्तक देने को कहा गया है.

स्टार कार्यकर्ता

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500 घरों में दस्तक देने वाले कार्यकर्ताओं को स्टार कार्यकर्ता के रूप में सम्मानित किया जा रहा है.

ऐसे कार्यकर्ताओं की तस्वीर नीतीश कुमार के आधिकारिक फेसबुक पन्ने पर डाली जा रही है और उन्हें जल्द ही नीतीश कुमार के साथ कॉफी पीने का भी मौका मिलेगा.

अभियान के बारे में जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार दावा करते हैं, ‘‘इस अनूठे अभियान से विकास को एजेंडा बनाने में हम सफल हुए हैं. इसमें हम तकनीक नहीं कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर लोगों बीच पहुंच रहे हैं.’’

ज़मीनी हकीक़त

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पूरे तामझाम से शुरू हुआ ये अभियान पार्टी के दावों के मुताबिक पूरी तरह ज़मीन पर उतरता दिखाई नहीं दे रहा है जबकि अभियान की तरीख कई बार आगे बढ़ाई जा चुकी है.

पटना के ही कई गली-मोहल्लों में यह अभियान नहीं पहुंचा है. ग्रामीण इलाकों में इसकी पहुंच और भी कम दिखाई दे रही है.

पटना से करीब 20 कलोमीटर की दूरी पर बसे कई गांवों के लोगों ने बताया कि अब तक कोई जदयू कार्यकर्ता उनके घर दस्तक देने नहीं आया है.

इनमें पटना जिले के फुलवारीशरीफ और संपतचक प्रखंड़ों के झाईंचक, छतना-पिपरा, खपुडै़लचक, भेलवाड़ा और मित्तनचक जैसे गांव शामिल हैं.

खपडै़लचक के विनय कुमार ने बताया, ‘‘मैंने इसके बारे में टेलीविजन पर देखा है, अखबारों में पढ़ा है. लेकिन अब तक मेरे गांव या पंचायत में कोई जदयू कार्यकर्ता सवाल-जवाब करने नहीं पहुंचा.’’

स्वाभिमान रैली

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हालांकि जानकारों का मानना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में पूरी तरह से हर घर पहुंचना किसी भी पार्टी के लिए बहुत मुश्किल है.

वरिष्ठ पत्रकार नलिन वर्मा कहते हैं, ‘‘चुनाव के दौरान संकेतों में बात कही जाती है. अभियान चलाए जाते हैं. जदयू का यह अभियान भी एक ऐसा ही प्रतीकात्मक अभियान है.’’

नलिन के मुताबिक अभियान की सफलता का पैमाना होगा कि ये पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार आम लोगों से कितना जोड़ कर रख पाता है. उनसे संवाद बनाने में कितना मददगार साबित होता है.

ऐसे में यह अभियान लोगों को जदयू से जोड़ने में कितना सफल रहा है इसकी एक झलक 30 अगस्त को मिल सकती है. 30 अगस्त को महागठबंधन यानी कि जदयू, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस की ओर से पटना में स्वाभिमान रैली का आयोजन होना है.

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