हम हिंसा से नहीं डरतेः हार्दिक पटेल

  • 26 अगस्त 2015
हार्दिक पटेल इमेज कॉपीरइट ANKUR JAIN

एक 22 वर्षीय युवक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रांत गुजरात के मुख्य शहर को दो दिनों से जाम कर देने वाले प्रदर्शनों का चेहरा बन गया है.

दो महीने पहले तक गुजरात के बाहर किसी ने भी हार्दिक पटेल का नाम नहीं सुना था. लेकिन आज वे भारत भर में सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं.

देखिए कौन हैं हार्दिक पटेल?

पटेलों या पाटिदार जाति के लोगों को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण देने की अपनी विवादित मांग के दम पर उन्होंने बेहद कम समय में लाखों समर्थक जुटा लिए हैं.

मंगलवार को अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में क़रीब तीन लाख लोग हार्दिक पटेल को सुनने के लिए जुटे.

उन्होंने 'पटेलों के साथ हो रहे अन्याय' पर भाषण दिया.

मोदी पर सवाल

एक घंटे के अपने भाषण में उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नायक रहे महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल से लेकर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तक का ज़िक्र किया. उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल पर सवाल उठाए.

हार्दिक पटेल ने कहा, "ये हमारे अधिकारों की लड़ाई है. अगर वे हमारी मांगे पूरी करते हैं तो हम विनम्रता से स्वीकार करेंगे लेकिन अगर हमें हमारा अधिकार नहीं दिया गया तो हम ताक़त के दम पर उसे छीन लेंगे."

भीषण गर्मी के बावजूद भीड़ हार्दिक पटेल के सवालों का मुट्ठियां भींच-भींचकर जबाव देती रही.

पहली नज़र में पटेल और मैदान में जमा भीड़ के बीच कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं दिखता.

ओजस्वी वक्ता

कॉमर्स में स्नातक करने वाले हार्दिक पटेल ख़ुद को बाइस साल का बताते हैं, पूरी आस्तीन की शर्ट पहनते हैं, छोटे क़द के हैं और संकोची दिखते हैं.

लेकिव वो ग़ज़ब के वक्ता हैं और अपने उग्र भाषणों के दम पर उन्होंने लाखों समर्थक जुटा लिए हैं.

वे बताते हैं कि उनका जन्म अहमदाबाद के क़रीब विरमगम में हुआ. उनके पिता पानी के पंपों का छोटा व्यवसाय चलाते हैं और वो ख़ुद घर पर ही रहते हैं.

वे कहते हैं, "मेरी बहन ने बीते साल बहुत अच्छे नंबरों के साथ हाई स्कूल की परीक्षा पास की लेकिन उसे छात्रवृत्ति नहीं मिली जबकि दूसरी जातियों के औसत नंबर लाने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति मिल गई."

गांधी-पटेल से प्रभावित

पटेल 2011 में महिलाओं और ग़रीब किसानों के शोषण के ख़िलाफ़ एक सामाजिक संगठन बनाकर सार्वजनिक जीवन में आए.

पटेलों के लिए नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मांगने का विचार उन्हें कुछ महीने पहले ही आया है.

वे कहते हैं कि मैं कुछ दिन पहले अपने दोस्तों के साथ बात कर रहा था और सभी का ये कहना था कि हममें से अच्छे नंबर लाने वाले छात्रों को भी अच्छे कॉलेज में दाख़िले और नौकरियां नहीं मिलती हैं.

हाल के दिनों में हार्दिक के कुछ समर्थकों ने उनका एक वीडियो यूट्यूब पर पोस्ट किया है.

वो इसमें राइफ़ल उठाए हुए दिख रहे हैं. हार्दिक कहते हैं कि वो महात्मा गांधी और सरदार पटेल से प्रभावित हैं.

भारी भीड़

विशेष तौर पर सरदार पटेल से प्रभावित हार्दिक पटेल 'जय सरदार' का नारा देते हैं. उनकी रैली में भी लोग सरदार पटेल का मास्क पहने दिख जाते हैं.

उन्होंने छह जुलाई को जब पहली रैली को संबोधित किया तो क़रीब बारह हज़ार लोग जुटे. उनकी दूसरी रैली में क़रीब पचास हज़ार लोग जुटे और रिपोर्टों के मुताबिक़ सूरत में हुई रैली में साढ़े चार लाख लोग जुटे.

मंगलवार को पटेल ने दावा किया कि उनकी रैली में दस लाख से ज़्यादा लोग आए जबकि पुलिस का कहना है कि सुरक्षा में लगाए गए ड्रोन से क़रीब तीन लाख लोग गिने गए.

उनके अचानक सुर्ख़ियों में आने से प्रशासन भी अचंभित है. गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने उनकी आरक्षण की मांग को ठुकरा दिया है लेकिन हार्दिक पटेल से बात करने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया है.

अभी तक की वार्ता से कोई नतीजा नहीं निकला है.

ग़रीब पटेल

गुजरात की आबादी का क़रीब बीस प्रतिशत पटेल हैं और हीरा को तराशने और चमकाने के व्यापार पर पटेलों का ही क़ब्ज़ा है. पटेल गुजरात के सबसे अमीर व्यापारियों और किसानों में भी शुमार किए जाते हैं. वे राजनीतिक रूप से भी एक ताक़तवर समुदाय हैं.

विदेशों में भी पटेलों की ख़ूब धमक है. ब्रिटेन में क़रीब ढाई लाख पटेल हैं जबकि अमरीका में उनकी तादाद क़रीब दो लाख है. उन्हें व्यापारिक समझबूझ के लिए जाना जाता है.

लेकिन हार्दिक पटेल कहते हैं कि सभी पटेल अमीर होते हैं ये बात मिथक है.

वे कहते हैं, "सिर्फ़ पांच-दस प्रतिशत पटेल ही अमीर हैं और इससे समूचा समुदाय अमीर नहीं हो जाता. अगर आप सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाक़ों में जाएंगे तो देखेंगे कि लोगों के पास खाने तक के लिए नहीं है. ग़रीब बहुत ज़्यादा हैं. जब आप बीते दस सालों में आत्महत्या करने वाले किसानों को देखेंगे तो पाएंगे कि सबसे ज़्यादा आत्महत्याएं पटेल किसानों ने ही की हैं."

हिंसा से नहीं डरते

आरक्षण व्यवस्था के प्रति ग़ुस्सा बढ़ रहा है और उनके अधिकतर युवा समर्थक अशांत हो रहे हैं.

इसी बीच हार्दिक पटेल ने प्रशासन को चुनौती दी है.

वे कहते हैं, "भारत और गुजरात क्रांतिकारियों की भूमि है. हम शांति में विश्वास रखते हैं और गांधी और सरदार पटेल के नक़्शे क़दम पर चलते हैं. लेकिन हम चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों से भी प्रभावित हैं और हिंसा का रास्ता चुनने से भी नहीं डरेंगे."

हार्दिक पटेल कहते हैं कि उन्होंने लंबी लड़ाई की तैयारी की है.

"ये सौ मीटर की फ़र्राटा दौड़ नहीं है बल्कि मैराथन है. हम अपना आंदोलन तभी वापस लेंगे जब गुजरात के 1 करोड़ 80 लाख पटेलों की मांगे पूरी होंगी."

(बीबीसी की गीता पांडे ने हार्दिक पटेल से अहमदाबाद में मुलाक़ात की)

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