गुजरात: 'पुलिसिया तोड़फोड़' की जांच के आदेश

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गुजरात हाई कोर्ट ने पटेल या पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए दंगों में पुलिस के अत्याचारों को गंभीरता से लिया है.

अदालत ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की जांच करवाएं और दो हफ़्ते के भीतर सोला में पुलिस के निजी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने वाली घटना की रिपोर्ट जमा करें.

पटेल समुदाय के आंदोलन के दौरान गुजरात में हिंसा के 48 घंटों ने पुलिस के क्रूर चेहरे को सामने लाया है.

इस हिंसा के दौरान गुजरात में कुल नौ लोगों की मौत हो गई.

गुजरात पुलिस के जबरन लोगों के घरों में घुसने और लोगों को बेरहमी से पीटने की वीडियो और तस्वीरें चौंकाने और झकझोर देने वाली हैं.

सोशल मीडिया पर वीडियो

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वकील विराट पोपट की एक याचिका पर गुजरात हाई कोर्ट ने सुनवाई की थी. विराट पोपट की कारों की पुलिस ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की थी.

मंगलवार शाम अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में पाटीदार प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने जब लाठीचार्ज किया तो पूरे गुजरात में हिंसा का माहौल बन गया. सोशल मीडिया पर बहुत से ऐसे वीडियो पोस्ट किए गए हैं जिनमें पुलिस अधिकारियों को घरों में घुस कर खिड़कियों के शीशे तोड़ते हुए देखा जा सकता है.

ऐसे दर्जनों वीडियो सोशल मीडिया पर हैं जिनमें पुलिस को कार की खिड़कियों को तोड़ते और वाहनों को नुक़सान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मीडिया में दिखाई जा रही सीसीटीवी फुटेज में पुलिस भी इन्हीं कामों को करते दिखाई दे रही है.

जज ने राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या पुलिस ने निजी संपत्ति और वाहनों को नुक़सान पहुंचाया.

सरकारी वकील ने जबाब दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना की जानकारी नहीं है.

सोला में नाराज़ भीड़ ने जब सार्वजनिक संपत्ति और एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया तो उसके बाद एडवोकेट पोपट की संपत्ति और उनके पड़ोसी आस्था बंगलोज़ की संपत्ति को भी कथित तौर पर पुलिस ने नुक़सान पहुंचाया.

पुलिस ही ऐसा करे तो रखवाला कौन

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जस्टिस परीवाला ने पुलिस हिंसा वाली सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा, "ये बहुत परेशान कर देने वाला है.

अगर पुलिस ऐसा करती है तो दंगाइयों और हिफ़ाज़त करने वालों में क्या फ़र्क़ रह जाता है?"

अहमदाबाद की एक मेजिस्ट्रेट ने पहले ही जीएमडीसी ग्राउंड पर रैली के दौरान पाटीदार आंदोलन समिति के समर्थकों पर हुए पुलिस के लाठी चार्ज और फिर हार्दिक पटेल को गिरफ़्तार करने पर जांच के आदेश दे दिए हैं.

जांच के आदेश इस आधार पर दिए गए हैं कि पुलिस की ज़्यादतियों की वजह से पूरे राज्य में हिंसा फैल गई जिसमें अब तक नौ लोग मारे गए हैं.

किसने दिया लाठीचार्ज का आदेश?

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मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने लोगों से हिंसा ख़त्म करने की अपील की थी और आश्वासन दिया था कि दोषी पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने कहा कि पुलिस को लोगों पर लाठी चार्ज करने के आदेश नहीं दिए गए थे.

गुजरात के गृहराज्य मंत्री रजनी पटेल और डीजीपी पीसी ठाकुर ने ये स्टेटमेंट भी जारी किया था कि पुलिस को लाठी चार्ज के आदेश नहीं दिए गए थे.

लेकिन एक सवाल जो गुजरात में हर व्यक्ति पूछ रहा है, वो ये कि आख़िरकार किसके आदेश पर पुलिस ने ये हिंसात्मक कार्रवाई की.

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