घूस न देने पर ऑक्सीजन की नली हटाने का आरोप

कटक में बच्चों का अस्पताल इमेज कॉपीरइट svppgip.org
Image caption सरदार बल्लवभाई पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ पीडियाट्रिक्स को ओडीशा में बच्चों का सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है.

ओडिशा के कटक में स्थित 'सरदार बल्लवभाई पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ पीडियाट्रिक्स' में पिछले सात दिनों में 35 नवजात शिशुओं की मृत्यु हो जाने से पूरे राज्य में खलबली मच गई है.

'शिशु भवन' के नाम से चर्चित पूर्वी भारत में बच्चों के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में बुधवार देर रात से अब तक पांच शिशुओं की मृत्यु हुई है.

बच्चों के मरने का यह सिलसिला पिछले वृहस्पतिवार की देर रात शुरू हुआ था.

राज्य सरकार ने एक साथ इतने शिशुओं की मृत्यु की वजह ढूंढने के लिए निदेशक, मेडिकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (डी.एम. ई.टी) विकास चंद्र महापात्रा के नेतृत्व में एक जांच समिति बनाई है.

समिति अस्पताल का दौरा कर रही है. लेकिन नवजात बच्चों की मौत का सिलसिला ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा.

मरने वालों के परिवार वालों का आरोप है कि इलाज में डॉक्टरों और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से बच्चों की मौत हो रही है.

कुछ अभिभावकों ने ऐसे आरोप लगाते हुए मंगलबाग थाने में एफआईआर भी दर्ज किया है.

सौ रूपए की घूस

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Image caption नर्सों पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं. (फ़ाइल तस्वीर)

अपना बच्चा खोने वाली एक माँ ने स्थानीय मीडिया से कहा है कि 100 रुपये घूस न देने के कारण नर्स ने उनके बच्चे के नाक पर लगी ऑक्सीजन की नली निकाल दी जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई.

अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने महिला के इस आरोप का संज्ञान लिया है और इसकी जाँच की जा रही है.

हालाँकि शिशु भवन के अधिकारी और डॉक्टरों ने लापरवाही के आरोप का खंडन किया है.

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर निरंजन महांती का कहना है, "सच यह है कि यहां अधिकाँश बच्चों को काफ़ी गंभीर हालत में लाया जाता है. हम अपनी ओर से उन्हें बचाने की पूरी कोशिश करते हैं. लेकिन इसके बावजूद कुछ बच्चों की मौत हो जाती है."

लेकिन अपना बच्चा खोने वाले माता, पिता डॉ महांती के इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं हैं.

जाजपुर के एक व्यक्ति, जिनके बच्चे की मंगलवार को मौत हो गई, कहते हैं; "ज़ाहिर है जब बच्चा गंभीर होगा, तभी यहां लाया जाएगा. अगर यहां के डॉक्टर कुछ नहीं कर सकते तो वो इस अस्पताल के पूर्वी भारत का सबसे बेहतर अस्पताल होने का दावा क्यों करते हैं?''

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