मोदी जी, 'हम भी तो बेटी हैं, हमारा क्या?'

  • 28 अगस्त 2015
नीलेश पटेल का परिवार, गुजरात

गुजरात में पटेल आरक्षण आंदोलन के बाद हुई हिंसा में जिन आठ लोगों की मौत हुई, उनमें से एक थे अहमदाबाद के नीलेश भाई पटेल.

दो दिन बाद मैं जब उनके घर गया तो वहां मातम छाया हुआ था. उनकी दो बेटियों में से एक 22 वर्षीय वैदेही पटेल काफी नाराज़ थीं. पुलिस से, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से.

पुलिस से इसलिए क्योंकि परिवार के अनुसार नीलेश की मौत पुलिस की लाठी से लगी चोट के कारण हुई. परिवार वालों के अनुसार उनके सर पर गहरी चोट आई थी.

नरेंद्र मोदी से वैदेही के नाराज़ होने की वजह ये थी कि वो इसी राज्य के हैं और उन्होंने 'बेटी बचाओ अभियान' चला रखा है.

वैदेही कहती हैं, "मैं पीएम मोदी से मिलना चाहती हूँ", पूछना चाहती हूं कि अब उनका और छोटी बहन पूजा का क्या होगा?

न पूरा होने वाला सफ़र

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वैदेही ने हाल में एमबीए की पढ़ाई पूरी की है लेकिन अभी नौकरी नहीं मिली है.

वैदेही कहती हैं, "हम भी तो बेटी हैं. हमारा अब क्या होगा. मेरे पापा घर में कमाने वाले अकेले व्यक्ति थे."

उनकी बहन पूजा कहती हैं कि मंगलवार रात उनके पापा दुकान से घर के लिए निकले लेकिन घर नहीं पहुंच पाए. घर के क़रीब एक सड़क पर वो पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हो रही झड़प की लपेट में आ गए.

पूजा के अनुसार उनके पिता पुलिस की लाठी से घायल होकर बेहोश पड़े रहे. कुछ घंटे बाद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

पूजा और वैदेही के दादा-दादी और दो चाचा वहीं रहते हैं लेकिन वो शहर के किसी दूसरे इलाक़े में रहते हैं.

जब मैं उनके घर गया तो पूरा परिवार वहां मौजूद था. नीलेश पटेल की तस्वीर के नीचे एक दिया जल रहा था और बैकग्राउंड में धार्मिक गीत की आवाज़ आ रही थी.

स्थानीय मीडिया की 'अनदेखी'

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जहाँ किसी की मौत हुई हो वहां पत्रकारों के लिए परिवार के सदस्यों से बात करना काफी कठिन होता है.

लेकिन इस परिवार की शिकायत थी कि स्थानीय चैनलों ने नीलेश की हत्या की ख़बर ठीक से कवर नहीं की.

परिवार वालों ने हम से देर तक बात की और कहा कि नीलेश की मौत के समय वो वहां मौजूद नहीं थे लेकिन जिन लोगों ने उन्हें वहां पिटते देखा उनका कहना था कि पुलिस ने अंधाधुंध डंडे बरसाए और नीलेश के सर पर लाठी मारी. उनका कहना था कि हिंसा की ज़िम्मेदार केवल पुलिस है.

वैदेही कहती हैं पीएम मोदी से उन्हें सिर्फ इंसाफ़ चाहिए. उन्हें पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री उनसे ज़रूर मिलेंगे.

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