'अध्यादेश जारी करने की कोई सीमा नहीं'

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संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना है कि किसी भी मुद्दे पर अध्यादेश जारी करने पर कोई सीमा संविधान ने तय नहीं की है.

अध्यादेश अनगिनत बार जारी किया जा सकता है. इसमें किसी तरह की क़ानूनी वैधता का मामला नहीं है.

बीबीसी से बात करते हुए कश्यप ने इसके साथ यह भी कहा कि एक ही मुद्दे पर बार-बार अध्यादेश जारी करना नैतिक रूप से उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि वाधवा मुद्दे पर कई बार अध्यादेश जारी किए गए थे. इसलिए किसी विषय पर सरकार चाहे जितनी बार अध्यादेश जारी कर सकती है.

कश्यप भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के बारे में कह रहे थे.

'संविधान ने सीमा तय नहीं की'

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सरकार के भूमि अध्यादेश की समय सीमा सोमवार को ख़त्म हो जाएगी और इसके साथ ही वह अध्यादेश भी ख़त्म हो जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में रविवार को यह साफ़ कर दिया कि सरकार अब भूमि अधिग्रहण अध्यादेश फिर नहीं लाएगी.

पर उन्होंने इसके साथ यह भी कहा कि अध्यादेश में जो 13 बिंदु हैं, उन्हें अमल में लाया जाएगा.

कश्यप ने कहा कि अध्यादेश से जुड़े जो 13 बिंदु हैं, उन्हें लागू करने के लिए नियम बनाने पड़ेंगे.

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इनमें से जो बिंदु एसेंशियल लेजिस्लेटिव पावर के तहत होंगे, उन्हें लागू करने के लिए संविधान संशोधन करना होगा.

दूसरे बिंदुओं के लिए सिर्फ़ नियम बनाना होता है.

यह अध्यादेश में साफ़ लिखा रहता है कि वे बिंदु किन नियमों के अधीन हैं. इसलिए इस मुद्दे पर कोई उलझन नहीं है.

तय नियमों के मुताबिक़, क़ानून बनाए जा सकते हैं और उन पर आसानी से अमल किया जा सकता है.

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