महिला थानों की पांच प्रमुख बातें

महिला पुलिस इमेज कॉपीरइट AP

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के ताज़ा आंकड़े भी दिखाते हैं कि 2012 के मुक़ाबले वर्ष 2014 में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के लगभग 40 फ़ीसदी ज़्यादा मामले दर्ज हुए.

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने अलग महिला पुलिस थाने बनाए जाने की सिफ़ारिश की थी.

आइए जानते हैं इन थानों की पांच प्रमुख बातें -

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

उत्तर प्रदेश पर पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें.

मक़सद - ताकि महिलाएं अपने ख़िलाफ़ होनेवाली हिंसा की शिकायत करने में और पुलिस की मदद लेने में सहज महसूस करें और इन मामलों की बेहतर जांच हो सके.

शिकायत - यहां सिर्फ़ महिलाओं के ख़िलाफ हिंसा के मामलों जैसे यौन हिंसा, दहेज के लिए अत्याचार, घरेलू हिंसा आदि की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

हालांकि कई महिला थाने शिकायत दर्ज करने के बाद जांच के लिए मामले को उस थाने में भेज देते हैं जहां महिला रहती है.

महाराष्ट्र पर पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें.

पुलिसकर्मी - इन थानों में सभी या ज़्यादातर पुलिसकर्मी महिला ही होती हैं, यानी कोशिश है कि कॉन्सटेबल से लेकर सीनियर अफ़सर तक, ज़्यादातर महिला पुलिस हों, लेकिन पुरुष पुलिस की नियुक्ति पर कोई पाबंदी नहीं है.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

बिहार पर पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें

बाध्यता - वर्ष 2009 की केंद्र सरकार की ये सिफारिश किसी राज्य पर बाध्य नहीं हैं क्योंकि पुलिस राज्य सरकार का विषय है.

इसलिए महिला पुलिस थानों की संख्या, उसमें नियुक्त किए गए पुलिसकर्मियों, उनके जांच के अधिकार आदि तय करने के लिए राज्य अपने नियम बना सकते हैं.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

जम्मू कश्मीर पर पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें

हेल्प डेस्क - देश के कई राज्यों में महिला पुलिसकर्मियों द्वारा संचालित थाने बनाए गए हैं.

पर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने विशेष महिला थाने बनाने की जगह (या उसके साथ) मौजूदा थानों में ही महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था की है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार