विदेशी सीख रही हैं घरों को रोशन करने का हुनर

  • 3 सितंबर 2015
सोलर लालटन की ट्रेनिंग इमेज कॉपीरइट ABHA SHARMA

“हमारे घरों में बिजली नहीं हैं. वैसे हमारी ज़िन्दगी में और भी बहुत सी मुश्किलें है पर इन दिनों युद्ध विराम के कारण थोड़ी राहत है. पहली बार इतनी तरह के बल्ब और रोशनी देखकर मैं बहुत चकित हूँ. खुश भी. मेरी हसरत है कि वापस घर लौटकर हमारे अँधेरे घरों को रोशन करने में कामयाब हो सकूँ.”

म्यांमार की नोऊ लामे उन 39 महिलाओं में से हैं जो राजस्थान के तिलोनिया स्थित बेयरफुट कॉलेज से सोलर ट्रेनिंग ले रही हैं.

केन्या की 50 वर्षीय लूसी पांच पोते-पोतियों की दादी हैं. उनके गाँव के अधिकाँश घरों में भी सब काम केरोसिन के लैंप और मोमबत्ती के सहारे होता है.

उनका बचपन भले ही चिमनी के धीमे प्रकाश में बीता है, पर वे अपनी भावी पीढ़ी को उजाले की सौगात देना चाहती हैं.

मोटस्वाना की डिग्वाकाकी भी बहुत उत्साहित हैं कि जब वे अन्य महिलाओं को सोलर ट्रेनिंग देंगी तो पूरे समुदाय को इसका लाभ मिलेगा.

सोलर लालटेन

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सोलर सर्किट्स, लालटेनों, कई तरह के पेचकसों और तारों के ढेर से पटी टेबल पर ट्रेनिंग ले रहीं 40 पार उम्र की इन महिलाओं में से कोई कम्बोडिया से है तो कोई मोटस्वाना, श्रीलंका, ग्वाटेमाला और कांगो से.

कुछ अन्य मुख्य अफ़्रीकी गणराज्य, डोमिनिकन रिपब्लिक, वियतनाम और मेक्सिको से भी.

भौगोलिक दूरियों और वेशभूषा, बोली और खानपान की भिन्नता के बावजूद इन सबका लक्ष्य एक ही है- अपने गाँव-घरों को रोशन करना.

ये सब बहुत पढ़ी लिखी नहीं है और दो-तीन को छोड़कर अंग्रेजी भाषा भी नहीं जानती हैं.

भाषा की समस्या सिर्फ सीखने वालों की ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षकों के लिए भी इम्तिहान से कम नहीं है.

मगनी कँवर बताती हैं, “शुरू शुरू में तो हर बात इशारे से समझानी पड़ती है फिर धीरे धीरे चित्र और प्रायोगिक प्रक्रिया से छह माह का प्रशिक्षण आगे बढ़ता है.”

प्रदूषण मुक्त ऊर्जा

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वैसे सुगमता के लिए एक चित्रमय मैन्युअल और आम बोलचाल में आने वाले हिंदी शब्दों के अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश, सुहाली रूपों की एक पुस्तिका भी तैयार की गई है.

लूसी अब थोड़ी-थोड़ी हिंदी बोल लेती हैं जैसे 'मालूम, नो मालूम, नमस्ते, अच्छा, खाना' आदि.

वो सोलर इंजिनियर बनकर बहुत खुश हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया, “मैं अपने देश की अन्य महिलाओं को भी यहाँ आने के लिए प्रेरित करूंगी जो देश से बाहर जाने से डरती हैं. मुझे बहुत अच्छा लगा यहाँ आकर. भारत के लोग बहुत अच्छे हैं और यहाँ का खाना भी.”

“सबसे बड़ी बात ये है कि सौर उर्जा भगवान ने बनाई है और यह प्रदूषण मुक्त भी है. इसकी मदद से हमारे बच्चे अच्छे से पढ़ सकेंगे और मैं अपने घर में टीवी भी लेना चाहूंगी ताकि ख़बरें देख सकूँ.”

सोलर होम लाइटिंग

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कार्यक्रम के संयोजक भगवत नंदन ने बीबीसी को बताया, “बेयरफुट कॉलेज द्वारा वर्ष 2008 से अब तक दक्षिण अफ़्रीकी, लातिन अमरीका सहित अन्य देशों की 449 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है."

"सोलर ट्रेनिंग के काम को आगे बढ़ाने के लिए सोलर होम लाइटिंग सिस्टम का ज़रूरी सामान जैसे सोलर पैनल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक चार्ज कंट्रोलर, वायरिंग किट, पैनल स्टैंड और एलईडी बल्ब आदि भी इनके लिए समुद्री जहाज द्वारा भेजा जाता है.”

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उन्होंने बताया कि “यह प्रशिक्षण भारत सरकार के आईटेक (इंडियन टेक्निकल इकोनोमिक कोपरेशन) द्वारा सहायता प्राप्त है. बंकर राय द्वारा 43 वर्ष पहले स्थापित बेयरफुट कॉलेज की ख़ास बात यह है कि यहाँ कोई औपचारिक डिप्लोमा या डिग्री नहीं दी जाती."

"प्रशिक्षुओं को अपने समुदाय से जो सराहना और समर्थन मिलता है, वही असली प्रमाण पत्र है.”

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