1965: कीलर बंधुओं ने ऐसे रचा था इतिहास

  • 15 सितंबर 2015
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Image caption 1965 के युद्ध में डेन्ज़िल कीलर ने भी अहम भूमिका निभाई थी.

उस दिन पठानकोट के नैट पायलटों को तड़के तीन बजे ही जगा दिया गया था. ब्रीफ़िंग रूम पहुंचने के लिए उन्हें दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था. उस ज़माने में जल्दी उठने पर बेड टी या नाश्ता देने का कोई रिवाज नहीं था.

ब्रीफ़िंग के बाद भारत के चार मिसटियर्स विमान 1500 फ़ीट की उँचाई पर उड़ते हुए छंब की ओर बढ़े. पाकिस्तानी रडारों ने इनकी गतिविधि को ट्रैक किया और कुछ ही पलों में उनको इंटरसेप्ट करने के लिए छह सेबर और दो स्टार फ़ाइटर वहां पहुंच गए.

लेकिन पाकिस्तानी रडार को ये नहीं दिखाई दिया कि इन मिसटियर्स विमानों के पीछे पीछें चार नैट लड़ाकू विमानों ने भी उड़ान भरी थी. वो चार उंगलियों का फ़ॉर्मेशन बनाते हुए ज़मीन से 300 फ़ीट की ऊँचाई पर उड़ रहे थे.

ट्रेवर ने सेबर गिराया

नैट्स को लीड कर रहे थे स्क्वॉड्रन लीडर ट्रेवर कीलर. उनके विंग मैन थे कृष्णास्वामी. कीलर ने सबसे पहले 5000 फ़ीट की दूरी पर सेबर को अपनी तरफ़ आते देखा. उन्होंने अपना नैट सेबर के पीछे लगा दिया.

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उनकी गति इतनी तेज़ थी कि उन्हें सेबर के पीछे बने रहने के लिए एयर ब्रेक लगाने पड़े. जैसे ही सेबर उनकी फ़ायरिंग रेंज में आया, कीलर ने करीब 200 गज़ की दूरी से अपनी 30 एमएम कैनन से सेबर के दाहिने हिस्से पर फ़ायर किया.

अगले ही क्षण सेबर का दायां पंख गिरने लगा और वो अनियंत्रित हो कर नीचे की ओर जाने लगा. ये 1965 में भारतीय वायु सेना द्वारा गिराया गया पाकिस्तान का पहला जहाज़ था. ट्रेवर कीलर को उसी दिन वीर चक्र देने की घोषणा की गई.

डेन्ज़िल कीलर की भिड़ंत

इसके ठीक 16 दिनों बाद चाविंडा सेक्टर में एक बार फिर नैट्स को मिसटियर्स को एस्कॉर्ट करने की ज़िम्मेदारी दी गई. नेट्स के एक सेक्शन को लीड कर रहे थे ट्रेवर कीलर के बड़े बाई डेन्ज़िल कीलर.

उनके साथ थे फ़्लाइंग ऑफ़िसर मुन्ना राय. दूसरे सेक्शन में थे फ़्लाइंग ऑफ़िसर विनय ‘कद्दू’ कपिला और फ़्लाइंग ऑफ़िसर विजय मायादेव. जैसे ही ये लड़ाकू विमान चाविंडा पहुंचे उनका स्वागत विमानभेदी तोपों से किया गया.

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Image caption 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रेवर और डेंज़िल कीलर ने अहम भूमिका निभाई थी.

ये विमान बहुत नीचे उड़ रहे थे इसलिए तोपों के गोले उनके ऊपर फट रहे थे. सबसे पहले कपिला ने 2000 फ़ीट की ऊँचाई पर चार सेबर्स को आते देखा. उन्होंने तुरंत रेडियो ट्रैफ़िक पर अपने साथियों को आगाह किया.

ये सेबर्स सरगोधा से आए थे और उनका नेतृत्व कर रहे थे स्क्वाड्रन लीडर अज़ीम दाउदपोता. न तो दाउदपोता और न ही उनके विंगमेन को पता चल पाया कि चार नैट्स नीची उड़ान भरते हुए उनके पीछे कब आ गए.

कीलर सेबर के पीछे जाने की कोशिश कर ही रहे थे कि उन्हें देख लिया गया और चारों सेबर रक्षात्मक ब्रेक में चले गए. नैट्स ने भी अपने आप को दो हिस्सों में बांटा. कीलर और राय सेबर के एक जोड़े के पीछे लग गए जबकि कपिला और मायादेव ने दूसरे सेबर जोड़े का पीछा करना शुरू कर दिया.

डेन्ज़िल-कपिला की जुगलबंदी

Image caption फ़्लाइंग आफ़िसर विनय कपिला बीबीसी स्टूडियो में रेहान फ़ज़ल के साथ.

जब डेन्ज़िल सेबर का पीछा करते हुए दाहिने घूमे तो राय से उनका साथ छूट गया. उन्होंने राय को रेडियो ट्रैफ़िक पर बताया कि वो वापस आदमपुर चले जाएं.

अब वो दो सेबर्स के सामने अकेले रह गए थे. इस बीच दूसरे सेबर्स का पीछा कर रहे कपिला अपने ड्रॉप टैंक गिरा चुके थे जिसस् उनको सेबर के मुकाबले मामूली सी बढ़त हासिल हो गई था. उन्होंने अपनी गति बढ़ाई और 500 गज़ की दूरी से सेबर पर सीधा हिट लिया.

उन्होंने 300 गज़ से सेबर पर दूसरा बर्स्ट मारा. उन्होंने देखा कि सेबर गुलाटियां खाने लगा है. तभी उन्हें कीलर की आवाज़ हेड फ़ोन में सुनाई दी, "कैप्स यू हैव हिट हिम ! मोस्ट लाइकली ही इज़ इजेक्टिंग."

कपिला अपने विमान को 90 डिग्री पर उड़ाते हुए ऊंचाई पर ले गए और वहां से उन्होंने सेबर को ज़मीन पर टकराते हुए देखा.

सरगोधा के पास विमान गिरा

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Image caption फ़्लाईंग आफ़िसर विनय कपिला की 1965 युद्ध के दौरान की लॉग बुक.

इस बीच, डेन्ज़िल न सिर्फ़ अपने हिस्से में आए दो सेबरों पर नज़र रख रहे थे बल्कि कपिला को रह रह कर टेल क्लीयर का संदेश भी भेज रहे थे. अचानक उन्होंने देखा कि एक सेबर वहाँ से सुरक्षित भाग निकलने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने अपना नैट उसके पीछे लगा दिया. सेबर नैट को नहीं देख पाया. जब वो अचानक दाईं और मुड़ा तो वो डेन्ज़िल की फ़ायरिंग रेंज में आ गया. सेबर को डेन्ज़िल का बर्स्ट लगा. उसमें से धुआँ निकलने लगा और वो तेज़ी से नीचे जाने लगा.

कीलर ने तेज़ी से अपने आप को हमले से अलग किया क्योंकि वो भी तब तक बहुत नीचे आ चुके थे और पेड़ की ऊँचाई पर उड़ रहे थे. तभी कपिला ने पीछे से आ कर ऊंचाई छोड़ रहे सेबर पर एक और कैनन बर्स्ट लगाया.

Image caption बीबीसी हिंदी स्टूडियो में डेंज़िल कीलर के साथ रेहान फ़ज़ल.

सेबर धुआं छोड़ता हुआ सरगोधा की और मुड़ा. सरगोधा के रनवे से कुछ ही दूरी पर ये विमान ज़मीन पर जा गिरा और इसके पायलट फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट एसएम अहमद को आग की लपटों और विस्फोट करते गोला बारूद के बीच बहुत बुरी अवस्था में बाहर निकाला गया.

उतरते समय टायर फटा

अभी कहानी ख़त्म नहीं हुई थी. जब डेन्ज़िल कीलर के नैट ने लैंड किया तो उसका टायर फट गया जिसकी वजह से पूरा रन वे ब्लॉक हो गया. कपिला को हलवारा डाइवर्ट किया गया. जिस समय उन्होंने वहाँ लैंड किया उस समय उनके विमान में ईधन की कुछ बूंदे ही बची थीं.

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Image caption इस तस्वीर में कीलर बंधु फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट पठानिया के साथ नज़र आ रहे हैं.

कपिला और डेन्ज़िल को इस बहादुरी के लिए वीर चक्र दिया गया. इतिहास में ये संभवत: पहला मौका था जब दो भाइयों ट्रेवर और डेन्ज़िल को एक ही लड़ाई में एक जैसा विमान उड़ाते हुए वीर चक्र से सम्मानित किया गया.

लड़ाई के बाद एयरमार्शल अर्जन सिंह खुद कीलर बंधुओं के घर लखनऊ गए और उनके पिता को उनके बेटों के कारनामे के लिए बधाई दी.

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