ये है अरबपतियों का नया 'कूल' खिलौना..

  • 2 सितंबर 2015
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फ़्लोरिडा के वेरी बीच इंडस्ट्रियल पार्क में 34 साल के इंजीनियर जॉन रामसे एक ऐसी पनडुब्बी को डिज़ाइन कर रहे हैं जो महासागर में सबसे गहरी पांच जगहों तक पहुंच सके.

लेकिन ये पनडुब्बी बनाई किसके लिए जा रही है? दरअसल ये एक अरबपति के लिए खास तौर पर डिज़ाइन की जा रही है.

रामसे कहते हैं, "यह दुनिया बदल देने वाली बात चाहे न हो, लेकिन ये इंडस्ट्री को बदलने देने वाली पनडुब्बी होगी."

इस पनडुब्बी में दो लोग बैठ पाएंगे और इसकी कीमत 2.5 करोड़ डॉलर है. इसे बनाने वाली कंपनी ट्रायटन सबमेरीन इसको छह महीने में डिज़ाइन करेगी और फिर अगले दो साल में इसे तैयार करेगी.

रामसे कहते हैं, "अब तक किसी ने पानी के अंदर इतनी गहराई तक जाने वाली पनडुब्बी नहीं बनाई है, जिसका इस्तेमाल बार बार संभव हो."

आम तौर पर पनडुब्बियां 1000 मीटर या कम गहराई तक जाती हैं. दरअसल, पनडुब्बी जैसे जैसे गहरे समुद्र में जाती है, वैसे वैसे उसके ढांचे पर दबाव बढ़ता है.

हर पनडुब्बी किसी ख़ास गहराई तक ही जा सकती है क्योंकि दबाव ज़्यादा होने से वो 'कोलैप्स' हो सकती है.

यही नहीं, गहरे समुद्र में जाने से सांस लेने के लिए अनिवार्य ऑक्सीजन पर भी दबाव बढ़ता है, इसीलिए महासागर की 5 सबसे गहरी जगहों पर पहुँचने वाली पनडुब्बी कोई आम पनडुब्बी नहीं है.

खेल का नया मैदान

तो यही है अरबपतियों का नया खिलौना और अरबपतियों का नया खेल. पनडुब्बियों के इन उपभोक्ताओं के लिए समुद्र की गहराई में जाना, मानो खेल के नए मैदान में जाने के समान है.

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हर ऐसी पनडुब्बी की कीमत करीब 30 लाख अमरीकी डॉलर से शुरू होती है. फिलहाल ऐसी 20-30 पनडुब्बियों ही दुनिया में हैं, और खरीददार बढ़ रहे हैं.

इन पनडुब्बियों के मालिक इनका इस्तेमाल एड्वेंचर के लिए, किराए पर क्रूज के लिए, अत्याधुनिक शोध और समुद्र में तबाह हुए जहाज़़ों को खोजने के लिए कर रहे हैं.

लोग 10 साल पहले जो करने की केवल कल्पना कर सकते थे, आज वो वाकेइ कर सकते हैं.

रहस्यमयी दुनिया में रुचि

अरबपतियों की नई जमात पानी के अंदर की दुनिया को देखना चाहती है, फिर पैसा जितना भी लगे.

निजी पनडुब्बियों से समुद्र की गहराइयों तक पहुंचने का अपना रोमांच तो है ही, साथ में यह लोगों के अंदर खोजबीन की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा देता है.

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कैलिफोर्निया में पनडुब्बी निर्माता सीमेगिन हाइड्रोस्कोप कॉर्प के प्रमोटर चार्ल्स कोहनन कहते हैं, "दरअसल आजकल पनडुब्बी का होना कूल फैशन माना जाता है और कोई भी आदमी इसके जरिए समुद्र की गहराइयों के रहस्यों को जान सकता है."

कोहनन कहते हैं, "यह केवल वहां तक पहुंचने की बात नहीं है, जहां अब तक कोई नहीं पहुंचा. बल्कि, वहां जाकर वापस लौटकर आने की बात है."

किराया रोज़ 30 हज़ार डॉलर

निजी पनडुब्बियों की इंडस्ट्री अभी बहुत बड़ी नहीं है और दुनिया में इन्हें बनाने वाली केवल चार कंपनियों हैं. कोहनन के मुताबिक पहली निजी पनडुब्बी साल 2000 में बिकी थी.

इन पनडुब्बियों के मालिक, इन्हें चार्टर यानी किराए पर भी उपलब्ध कराते हैं. अमूमन ऐसी पनडुब्बियों का किराया 30 हज़ार डॉलर रोज़ाना है. अरबपति इन्हें छुट्टियां मनाने के साथ-साथ समुद्री रहस्यों की पड़ताल के लिए भी शोध समूहों को किराए पर देते हैं.

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ज़्यादातर शोध संस्थाएं पनडुब्बियां खरीद नहीं सकती हैं, और न ही उनका महँगा रखरखाव कर सकती हैं.

2013 में एक निजी पनडुब्बी में जापान के समुद्री तट पर पहली बार शोधकर्ता खोजबीन के लिए निकले, और पहली बार इसे फ़िल्माया गया.

इसी साल मार्च में, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक पॉल एलन की निजी पनडुब्बी का इस्तेमाल कर रहे शोधकर्ताओं ने जापान के जहाज़ मूसाशी को तलाशा जो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फिलिपींस के समुद्री तट पर डूब गया था.

गहराई तक पहुंचने का रोमांच

कई बार, निजी पनडुब्बियों के मालिक भी इस तरह की खोज से रोमांचित होते हैं. 2012 में फिल्मकार जेम्स कैमरुन ने सबसे ज़्यादा गहराई तक डाइविंग करने का रिकॉर्ड बना दिया.

वे खुद ही अपनी पनडुब्बी से समुद्र के अंदर खोजबीन करने निकले थे. इसी दौरान उन्होंने मारिना ट्रेंच को भी खोज निकाला. यह पश्चिमी प्रशांत महासागर में समुद्र के अंदर सबसे गहरी जगह है.

कैमरुन की पनडुब्बी में गहराई में समुद्र के पानी का दबाव झेलने की क्षमता नहीं थी, लिहाजा एक यात्रा के बाद ही वह पनडुब्बी बेकार हो गई.

ज़्यादातर निजी पनडुब्बियों को तैयार करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है इसका कंपार्टमेंट बनाने की, क्योंकि समुद्र के अंदर बहुत अधिक दबाव झेलना पड़ता है.

ट्रायटेन अपनी पनडुब्बियों में 6.5 इंच मोटे एक्रेलिक बबल का इस्तेमाल कर रही है जो जर्मनी में बना है और उसकी कीमत 10 लाख डॉलर है. गहराई तक पहुंचने के लिए, पनडुब्बी को टिकाऊ बनाने की कोशिश हो रही है.

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रामसे कहते हैं, "इसमें अल्ट्रा थिक ग्लास का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके चलते यह पनडुब्बी चार या पांच गुना महंगी हो जाएगी."

टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी नॉटिक्ल आर्केयोलॉजी प्रोग्राम के प्रोफेसर एमरेटस जॉर्ज बास के मुताबिक ऐसी निजी पनडुब्बी अनुसंधान के लिए कितनी कारगर होंगी, यह स्पष्ट नहीं है.

जॉर्ज बस दुनिया के सबसे मशहूर खोजकर्ता हैं. भूमध्यसागर में वे कई जहाज़ों के अवशेष तलाश चुके हैं. सीमेगिन की एक पनडुब्बी की मदद से तुर्की के समुद्रीतट पर उन्होंने एक महीने में 14 जहाज़ों के अवशेष तलाश लिए थे.

निजी पनडुब्बी का रोमांच

जॉर्ज बास के मुताबिक इस तरह की खोजबीन और शोध का काम निजी पनडुब्बी रखने वाले लोग नहीं कर सकते. वो कहते हैं, "निजी पनडुब्बी वाले लोग एक दो जहाज़ों के अवशेष तलाश सकते हैं. लेकिन इसके लिए काफ़ी अनुसंधान की जरूरत है."

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कोस्टा रिका में एक पनडुब्बी का नाम डीप सी है, जिसका इस्तेमाल एडवेंचर ट्रैवलर्स, रिसर्चर्स और वैज्ञानिक करते हैं. इसका इस्तेमाल कोको आईलैंड के आसपास 350 मील दूर तक किया जाता है. इसके पास पानी का प्रवाह काफी ज्यादा है और इसकी वनस्पतियां बेहद ख़ास हैं.

डीप सी की मालिक एक प्राइवेट कंपनी है, जो कोस्टा रिका यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं को मुफ्त में सैर कराती है. ऑपरेशन मैनेजर शामुलिक बल्म के मुताबिक इस दौरान उन्हें कई बार अनजाने रहस्यों को जानने का मौका मिलता है.

दो साल पहले कोस्टा रिका के अनुसंधानकर्ताओं ने वनस्पतियों की नई प्रजाति की खोज की जो पिछले 40 सालों की कोशिशें के बावजूद नहीं हुई थी. ये वनस्पतियां पानी के अंदर मौजूद थीं, जिन्हें कभी रोशनी नहीं मिलती.

डीप सी पनडुब्बी की रोबोटिक आर्म की मदद से अनुसंधानकर्ताओं ने वनस्पतियों के सैंपल लिए, ताकि लैब में उनका अध्ययन किया जा सके.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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